दिल्ली गैंगरेप: SC ने कहा- दोषियों ने जो क्रूरता की वो कभी नहीं सुनी, पढ़ें फैसले की पांच बड़ी बातें

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के दिल्ली गैंगरेप में चार दोषियों को फांसी की सजा को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा उनका अपराध समाज के मानस को झकझोड़ देने वाला था, जिसके लिए सिर्फ एक ही सजा है और वह है मृत्युदंड।

जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने खचाखच भरे कोर्ट में जब आरोपियों को मौत की सजा सुनाई तो उस समय दर्शकदीर्घा से तालियां बजने लगी।

कोर्ट ने इशारे से उन्हें चुप कराया।
कोर्ट ने दोषियों की कम उम्र, उनके बच्चे, बुजुर्ग माता-पिता आदि होने के कारण सजा कम करने तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, जो क्रूरता दोषियों ने पीड़िता के साथ की वह कभी सुनी नहीं गई। दोषियों ने पीड़िता के साथ ओरल, एननेचुरल सेक्स करने बाद उसकी आँखें बाहर निकाल दी ये क्रूरता की इंतेहा थी।

पीठ की तीसरी जज आर भानुमति की इस फैसले को लेकर अलग राय थी लेकिन जस्टिस दीपक मिश्रा और अशोक भूषण की सहमति से फैसला दिया गया। भानुमति ने कहा कि यह घटना होने के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, लोगों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत है। इस मामले में एक नाबालिग शामिल था, जिसे छोड़ा जा चुका है। एक दोषी जेल में आत्‍महत्या कर चुका है। अब इन दोषियो के पास सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचना और राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का विकल्प है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा…

– इस पूरे मामले ने देश को झकझोर कर रख दिया था।
– अमीकस क्यूरी की ओर से दी गई दलीलें दोषियों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
– कठोर सजा मिलेगी तभी समाज में भरोसा पैदा होगा।
– गुनाह ऐसा की माफी की गुजाइंश नहीं।
– 16 दिसंबर की घटना बर्बरता पूर्ण।

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