इसरो के सेटेलाइट करेंगे छत्तीसगढ़ के खनिजों की निगरानी

रायपुर । छत्तीसगढ़ में मुख्य खदानों को ऑनलाइन करने के बाद खनिज विभाग अब गौण खनिजों को भी इसरो के सेटेलाइट से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। पहले चरण में डोलामाइट और लो ग्रेड लाइम की खदानों को इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

इसके बाद अन्य खदानों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। खनिज विभाग इन दिनों गौण खनिजों की बड़ी खदानों की सूची बना रहा है। 1 जून से मैन्युअल ट्रांजिट पास (टीपी) बंद कर ई-ट्रांजिट पास जारी किया जाएगा। इसरो के सेटेलाइट की मदद से खदानों पर नजर रखी जाएगी।

प्रदेश में गौण खनिज की करीब 2 हजार खदानें हैं। खनिज विभाग के अफसरों ने बताया कि जिन खदानों का माइनिंग प्लान पहले बन चुका है उनके डीजीपीएस नक्शे खनिज विभाग ने जुटा लिए हैं। खनिज विभाग पिछले एक दशक से खदानों को ऑनलाइन करने की तैयारी कर रहा है।

एक बार पहले भी यह कोशिश की गई, लेकिन तब इसरो को खदानों के मैन्युअल नक्शे दिए गए जिससे योजना फेल हो गई थी। भारत में भूमि के मैन्युअल नक्शे हिमालय को आधार मानकर तैयार किए गए हैं, जबकि सेटेलाइट डिफरेंशियल जियोमेट्रिक सिस्टम (डीजीपीएस) से गणना करता है।

इन नक्शों की मदद से खदान के चिन्हित क्षेत्र की सटीक गणना कर उस इलाके के सेटेलाइट इमेज भेजा जा सकता है। इसरो के सेटेलाइट इमेज आईबीएम के सॉफ्टवेयर को ट्रांसफर होते हैं। यह ऐसा सॉफ्टवेयर है जो चिन्हित क्षेत्र के बाहर उत्खनन हुआ तो तुरंत पकड़ लेता है।

पिछले कुछ सालों में खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति देते समय डीजीपीएस पॉइंट पर आधारित नक्शे बनवाए गए। अब इनका उपयोग किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए छत्तीसगढ़ खनिज विभाग ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विभाग से करार किया है।

वाहनों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी

सेटेलाइट से जुड़ी खदानों से परिवहन के लिए वाहनों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। ई-ट्रांजिट पास उन्हीं खदान मालिकों को दिया जाएगा जिनके वाहनों का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन हो। खनिज नाकों को भी हाइटेक किया जा रहा है।

कम्प्यूटरीकृत ऑनलाइन व्यवस्था बनाई जा रही है। यहां कम्प्यूटर लगेंगे। ई ट्रांजिट पास की चिप से कम्प्यूटर में परिवहन किए जाने वाले खनिज की पूरी जानकारी दर्ज हो जाएगी और खनिज ऑनलाइन साफ्टवेयर को ट्रांसफर हो जाएगी।

दूरस्थ खदानों में दिक्कत

राज्य सरकार सभी खदानों को ऑनलाइन बनाने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन गौण खनिज की दूरस्थ खदानों में दिक्कत आ रही है। कई जगहों पर बिजली नहीं है, जिससे कम्प्यूटर नहीं लगाया जा सकता। खनिज नाकों में स्कैनर और सड़क के नीचे आटोमेटिक वेइंग मशीन लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

– गौण खनिजों को सेटेलाइट से जोड़ने का काम चल रहा है। पहले चरण में डोलामाइट और लो ग्रेड लाइम की बड़ी खदानों को इस योजना में शामिल किया गया है। हम 1 जून से ई-ट्रांजिट पास की व्यवस्था लागू करने जा रहे हैं।

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