छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्ति अभियान में शानदार योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और विश्व बैंक की ओर से किया गया प्रदान

रायपुर।छत्तीसगढ़ के नाम एक और उपलब्धि शुक्रवार को जुड़ गई। कुपोषण मुक्ति अभियान में शानदार योगदान के लिए छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और विश्व बैंक की ओर से प्रदान किया गया यह पुरस्कार सरकार की ओर से चलाई जा रही इस्निप परियोजना के लिए प्रदान किया गया है।

– नई दिल्ली में हुए समारोह में छत्तीसगढ़ सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को इस पुरस्कार से नवाजा गया। केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव और विश्व बैंक की प्रेक्टिस मैनेजर रेखा मेनन के हस्ताक्षर से समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य को प्रशस्ति पत्र भी दिया गया।

– मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू ने इस उपलब्धि पर इस्निप परियोजना में शामिल जिलों की जनता को और वहां के आंगनबाड़ी केन्द्रों की कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बधाई दी है।

17 जिलों में चार साज से चल रही परियोजना

– महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस्निप परियोजना छत्तीसगढ़ के 27 में से 17 जिलों में विगत चार वर्षों से (वर्ष 2014 से) चल रही है। इसे विश्व बैंक की सहायता से एकीकृत बाल विकास सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और पोषण की स्थिति को सुधारने के लिए चलाया जा रहा है।

– यह पुनर्गठित परियोजना जून 2018 तक चलेगी। इस परियोजना में राज्य के महासमुंद, कोरबा, दुर्ग, कवर्धा, जशपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, रायपुर, बेमेतरा, बालोद, सुकमा, कोण्डागांव, गरियाबंद और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले शामिल हैं।

– इन चयनित जिलों की 134 एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 682 आंगनबाड़ी केन्द्रों में इस्निप परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इस्निप परियोजना के तहत बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।

– इस्निप में शामिल 17 जिलों के सभी 28 हजार 682 आंगनबाड़ी केन्द्रों में हर महीने सुपोषण चौपाल का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक एवं पारंपरिक गतिविधियों जैसे-गोद भराई, बच्चों के अन्न प्राशन्न और बाल भोज आदि शामिल हैं।

– कुपोषण के प्रति समाज को और विशेष रूप से माताओं को सचेत करना और जागरूक बनाना सुपोषण चौपाल का मुख्य उद्देश्य है। इसमें बच्चों के अन्न प्राशन्न के जरिए उनकी माताओं को पौष्टिक आहार का महत्व बताया जाता है। गोद भराई की रस्म का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान माताओं के खान-पान और उनकी अच्छी देखभाल के महत्व से परिवारों को जागरूक करना है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल और टैबलेट भी दिए

– अधिकारियों ने बताया कि इस्निप परियोजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल फोन और पर्यवेक्षकों को कम्प्यूटर टेबलेट भी दिए गए हैं। उनके लिए मोबाइल एप भी तैयार किया गया है। इससे वे अपने-अपने आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों और उनकी माताओं के कुपोषण की स्थिति में सुधार के बारे में मोबाइल एप के जरिए ऑनलाइन रिपोर्ट अपने विभाग को भेज सकेंगे।

– इससे रियल टाइम रिपोर्टिंग काफी आसान हो गई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 में सात जिलों-रायपुर, दुर्ग, महासमुन्द, गरियाबंद, कबीरधाम, बालोद और बेमेतरा की 43 एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं में 10 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल फोन दिए जा चुके हैं।

– इस्निप परियोजना में शामिल प्रदेश के सभी 17 जिलों को लक्ष्य आधारित उपलब्धि हासिल करने में अच्छी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य ने इस्निप परियोजना के दो निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में प्राप्त करते हुए देश के प्रथम तीन अग्रणी राज्यों में पांच बार अपना स्थान बनाया है।

– आंगनबाड़ी केंंद्रों में वर्ष 2012 से वजन त्यौहार भी शुरू किया गया है। इन उपायों के फलस्वरूप राज्य में विगत पांच वर्ष में कुपोषण की दर 40.05 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार 27.11 प्रतिशत रह गई है।

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