राहुल ने पेगासस जासूसी को देशद्रोह बताया, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी विवाद को लेकर सदन के अंदर संग्राम कर रहे विपक्षी दलों ने शुक्रवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए राजनेताओं-पत्रकारों समेत कई प्रमुख हस्तियों के फोन की जासूसी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पोस्टर-बैनरों के साथ जासूसी को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे देशद्रोह तक करार दिया।

राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवादियों और अपराधियों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल देश के लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं के खिलाफ किया है। उनकी जासूसी किए जाने का सरकार पर आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि उनके हर फोन की टैपिग और दिनचर्या की जासूसी की जाती है। जासूसी प्रकरण को लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास करार देते हुए राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग उठाई।

पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने कहा कि जासूसी केवल उनकी निजता का मामला नहीं है। विपक्ष के एक नेता के रूप में वे जनता की आवाज उठाते हैं और जासूसी जनता की उस आवाज पर हमला है। राहुल ने कहा कि पेगासस का सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस्तेमाल हुआ और राफेल की जांच रोकने के लिए भी इसे हथियार बनाया गया। राफेल मामले में एफआइआर से ठीक पहले सीबीआइ के निदेशक की फोन टैपिंग की गई और उन्हें ब्लैकमेल किया गया। इस कृत्य के लिए उनके पास एक ही शब्द है-देशद्रोह।

अमित शाह पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सु्प्रीम कोर्ट की निगरानी में जासूसी कांड की न्यायिक जांच होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को भी जांच के दायरे में लाना चाहिए। राहुल ने कहा, सरकार इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब क्यों नहीं दे रही कि उसने पेगासस खरीदा है या नहीं, क्योंकि इसे तो केवल सरकारों को ही बेचा जा सकता है।

राहुल ने कहा कि कई बार तो उनके मित्रों को बोला जाता है कि राहुल गांधी को बता दीजिए कि उनकी फोन की टैपिंग हो रही है। इतना ही नहीं उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी बताते हैं कि उन्हें अपने वरिष्ठों को यह बताना प़़डता है कि राहुल गांधी ने क्या-क्या कहा। ऐसी जासूसी से भयभीत होने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं खुली किताब हूं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। सामान्य सी बात है। भारत की राजनीति को आप समझना चाहते हैं। अगर आप भ्रष्ट हैं, चोर हैं तो आपको डर लगेगा और भ्रष्ट या चोर नहीं हैं तो मोदीजी से बिल्कुल डर नहीं लगेगा, हंसी आएगी।’

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