रोजी-रोटी की तलाश में मजदूर, झाबुआ जिले में पलायन आरंभ

झाबुआ। प्रमुख त्‍योहार खत्म होते ही रोजी रोटी की तलाश में ग्रामीण मजदूरों का पलायन शुरू हो जाता है। ग्रामीण परिवार सहित मजदूरी के लिए राजस्थान, गुजरात सहित महाराष्ट्र की ओर रुख कर रहे हैं। बस स्टैंड पर सुबह से ही पलायन करने वाले ग्रामीणों का तांता लगाना शुरू हो जाता है। गुजरात व राजस्थान की बसों में तो पैर रखने की तक की जगह नहीं मिल पाती है।

हर साल झाबुआ जिला मुख्यालय के बस स्टैंड तथा जिले में प्रमुख रेलवे स्टेशन मेघनगर पर पलायन करने वालों की संख्या काफी दिखती है। सबसे अधिक ग्रामीण गुजरात राज्य का रुख करते हैं। अंचल के ग्रामीण बड़ौदा, अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, मोरवी सहित महाराष्ट्र व राजस्थान के बड़े शहरों में मजदूरी की तलाश में जाते हैं।

कुछ मजदूरों ने बताया कि मनरेगा में काम बंद पड़े हैं। 2 साल से सामग्री का भुगतान नहीं हुआ है। 10 करोड़ के लगभग पैसा बाकी है। मजदूरी का भुगतान भी कई-कई महीनों बाद हो रहा है। यह वजह भी मजदूरों के पलायन की है।

अहमदाबाद मजदूरी के लिए जा रहे एक मजदूर ने बताया कि गुजरात राज्य में मजदूरी का झाबुआ की अपेक्षा डेढ़ से दो गुना पैसा मिलता है, इसलिए सबसे अधिक लोग गुजरात ही जाते है। कुछ मजदूरों का कहना था कि गुजरात में उनकी उनकी पहचान के कुछ लोग पहले से काम कर रहे है। वहां मजदूरी 500 से 600 स्र्पए प्रतिदिन मिलती है।

मजदूरों का कहना है कि क्षेत्र में मजदूरी का पर्याप्त पैसा नहीं मिलता है, जिसके कारण पलायन करना पड़ता है। भूरीमाटी, भोयरा, भीमफलिया आदि से भी बड़ी संख्‍या में मजदूर काम की तलाश में पलायन करते हैं।

फैक्ट फाइल

– 10 लाख 74 हजार के करीब जिले की जनसंख्या

– 06 लाख से अधिक का वर्षभर में होता है पलायन

– डेढ गुना मिलती है अन्य प्रदेशों में मजदूरी

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