हाईकोर्ट पहुंचा प्रदेशव्यापी अधिवक्ता हड़ताल का मामला

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके एमपी स्टेट बार कौंसिल के उस आह्वान का विरोध किया गया है, जिसके जरिए 9 से 14 अप्रैल तक वकीलों को पैरवी करने से रोका गया है। जबलपुर निवासी अधिवक्ता प्रवीण पाण्डेय ने दायर जनहित याचिका के जरिए प्रतिवाद दिवस पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में बार कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को पत्र भेजा गया है। पत्र के जरिए एमपी स्टेट बार कौंसिल की हड़ताल को अवैध घोषित किए जाने पर बल दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि एक सप्ताह तक वकीलों की हड़ताल से पक्षकारों को भारी परेशानी होगी। साथ ही अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ बढ़ेगा। साथ ही कई कर्मठ वकीलों की आमदनी भी प्रभावित होगी।

इनको बनाया पक्षकार

जनहित याचिका में राज्य शासन, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग और सचिव स्टेट बार कौंसिल मध्यप्रदेश को पक्षकार बनाया गया है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि क्या स्टेट बार जैसी वैधानिक संस्था को इस तरह हड़ताल का आह्वान करने का अधिकार है? क्या वकीलों को प्रतिवाद दिवस पर बलपूर्वक पैरवी करने से रोकना उचित होगा? क्या प्रतिवाद दिवस का समर्थन या विरोध करने के लिए प्रत्येक वकील को स्वतंत्र नहीं छोड़ना चाहिए?

क्यों न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे वकील

एमपी स्टेट बार कौंसिल के चेयरमैन शिवेन्द्र उपाध्याय ने प्रदेश में न्यायाधीशों के रिक्त पद न भरे जाने और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू न किए जाने सहित अन्य अधिवक्ता हित से जुड़े बिन्दुओं को आधार बनाकर सात दिवसीय प्रतिवाद दिवस की घोषणा की है। सदस्य राधेलाल गुप्ता व आरके सिंह सैनी ने बताया कि प्रतिवाद दिवस के दौरान राज्य का कोई भी वकील किसी भी अदालत में पैरवी नहीं करेगा।

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