बंपर पैदावार से औंधे मुंह गिरा टमाटर, मंडी में दो रुपए किलो

मध्यप्रदेश में इस बार टमाटर की बंपर पैदावार के कारण भाव औंधे मुंह गिर गए हैं। थोक मंडी में ये दो से चार रुपए किलो बिक रहे हैं। हालात ये हैं कि टमाटर उत्पादक किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कई जगह किसानों ने टमाटर की फसल उखाड़ना शुरू कर दी है। खपत से ज्यादा रकबा और उत्पादन बढ़ने से ये हालात बने हैं।

इंदौर की देवी अहिल्याबाई फल और सब्जी मंडी (चोइथराम मंडी) में हर दिन सात-आठ हजार कैरेट टमाटर आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जितना माल आ रहा है, उतनी खपत नहीं है। पिछले साल टमाटर से किसानों को फायदा हुआ था लेकिन इस बार भाव इतने कम हैं कि लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारी योगेश विरहे बताते हैं कि पिछले साल का फायदा देखते हुए इस बार कई किसानों ने टमाटर बोया। बंपर उत्पादन के कारण अब इसे संभालने में दिक्कत आ रही है।

बेहतर भाव मिलने की उम्मीद में क्षेत्र के किसान दिल्ली मंडी में भी अपना माल ले जा रहे हैं, लेकिन वहां भी खास फायदा नहीं हो रहा है। अंजड़ क्षेत्र के किसान महेश पाटीदार बताते हैं कि टमाटर का औसत भाव 40 से 75 रुपए कैरेट ही मिल रहा है जबकि तुड़ाई, मंडी तक माल ले जाने का भाड़ा और मंडी का खर्च काटकर 30 से 50 पैसे प्रति किलो ही हाथ आ रहे हैं। अंजड़ के किसान अनिल पाटीदार का कहना है कि गुजरात और महाराष्ट्र से भी टमाटर की आवक एक साथ शुरू होने से ये हालात बने हैं। इस बार किसान मुनाफा होना तो दूर उल्टे घाटे में जाएंगे।

गोभी, लौकी, पालक-मैथी भी सस्ती

केवल टमाटर ही नहीं है, गोभी, लौकी, मैथी और पालक की भी पूछपरख कम चल रही है। फूल गोभी 4-5 रुपए तो पत्ता गोभी 2 रुपए नग में बिक रही है। लौकी को तो 1.50-2 रुपए किलो से अधिक में कोई पूछने वाला नहीं मिल रहा है। थोक मंडी में पालक 2 रुपए और मैथी 8-10 रुपए किलो में आसानी से मिल रही है। चोइथराम मंडी के प्लेटफॉर्म थोक सब्जी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बिंजवा ने बताया कि जो रिटेल दुकानदार मंडी से माल लेकर व्यापार करते हैं, उनकी सब्जियां न बिकने से वे भी जल्दी लौटकर नहीं आते।

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