नदी महोत्सव शुरू, मुख्यमंत्री सरोवर योजना शुरू होगी, नदियों का संरक्षण भी होगा

होशंगाबाद। प्रदेश में अब मुख्यमंत्री सरोवर योजना शुरू होगी जिसके जरिए जन सहयोग से तालाब बनाने का प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा नर्मदा और 300 से ज्यादा सहायक नदियों और तालाबों के संरक्षित किया जाएगा। ये घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांचवे नदी महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर की। होशंगाबाद के बांद्राभान गांव में 2 दिनी नदी महोत्सव के शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश सोनी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

उपस्थित जनसुमदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री सरोवर योजना लाएगी जिसके जरिए नर्मदा और अन्य नदियों के विकल्प के तौर पर तालाबों का निर्माण किया जाएगा। सरकार इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके अलावा 300 से ज्यादा सहायक नदियों और तालाबों को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। प्रदेश के विकास के लिए मां नर्मदा को समृद्ध बनाया जाएगा। इतना ही नहीं नर्मदा की जलधार नदी के तट पर फिर वृहद पौधरोपण किया जाएगा। वृक्षारोपण के अलावा ज्यादा से ज्यादा तालाबों का निर्माण किया जाएगा जिससे नदियों के जलस्तर बढ़े। सीएम ने कहा कि पिछले साल नर्मदा किनारे 6 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए थे जिनमें से 80 फीसदी जीवित है। इसी तरह का वृहद पौधरोपण इस बार भी किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने अपने संबोधन में कहा कि आज पानी की कमी भारत की सबसे बड़ी समस्या है। पानी की कमी का समाधान हमारी नदियों के संरक्षण में ही निहित है। उन्होंने कहा कि नदी का संबंध केवल पानी से नहीं है बल्कि नदियोंं का प्रभाव उसके प्रवाह के आसपास बसे लोगों, जीव-जंतु और जानवरों के जीवन यापन से जुड़ा है।

उन्होंने ये भी कहा कि जल, जंगल, जमीन का सही उपयोग नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि पानी की कमी का सबसे बड़ा कारण है कि पानी के नियोजन की कमी। देश का 70 फीसदी से ज्यादा पानी समुद्र में मिल जाता है। इसलिए पानी के नियोजन के लिए सही प्लानिंग जरूरी है। हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। साढ़े 8 लाख करोड़ के 30 प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं, जबकि अब भी कई करोड़ों के प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं।

गढ़करी ने कहा कि भारत की नदियों का पानी पाकिस्तान में बह रहा है। जिस पानी पर देश का अधिकार है उस पर कोई नहीं बोलता है, लेकिन पानी के लिए ही अपने देश के राज्य आपस में लड़ रहे हैं। ये पानी के गलत नियोजन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश सोनी ने भी प्राकृतिक स्रोत्रों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समस्या केवल जल, जंगल और जमीन की नहीं है, बल्कि हवा, पर्यावरण की शुद्धता की भी है। इसके लिए नदियों का संरक्षण जरूरी है। ये वैश्विक समस्या है और इस पर वैसे ही वृहद स्तर पर काम करने की जरूरत है। खेती में केमिकल के उपयोग ने जमीनों को बंजर बना दिया है। इस पर लगाम लगनी चाहिए। इसलिए वृहद प्रयास जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विकास और आधुनिक तकनीक के प्रयास केवल मानव को आधार मानकर ही किए जा रहे हैं, जबकि इनमें पेड़-पौधे, नदी, जल, जमीन, वन्यजीव, जीव-जन्तुओं के बारे में विचार नहीं किया जा रहा। इसलिए ये असंतुलन पैदा हो रहा है।

सभी अतिथियों ने इस मौके पर दिवंगत मंत्री अनिल माधव दवे और नर्मदा सहित अन्य नदियों के लिए किए उनके प्रयासों को याद किया।

आयोजन स्थल पर तैयार हुए कुटीर

नदी महोत्सव में बाहर से आने वाले प्रतिभागियों के पंजीयन, बैठक और आवास से लेकर सुरक्षा एवं भोजन आदि व्यवस्थाओं का भी विशेष रूप से इंतजाम किया गया है। दो दिवसीय नदी महोत्सव कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र के बाद 4 समानंतर सत्र आयोजित हो रहे हैं। इस बार के विशेष विषय पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

समानान्तर चर्चा का होगा सत्र

समानान्तर चर्चा (समग्र सत्र) में मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय मंत्री उमा भारती जी सहित समानान्तर सत्र के अध्यक्षगण क्रमशः भारती ठाकुर, श्रीनिवास मूर्ति , अजय झा , डॉ अनिर्बन गांगुली उपस्थित रहेंगे। 17 मार्च को समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर , विशिष्ट अतिथि वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार उपस्थित रहेंगे एवं इस समापन सत्र की अध्यक्षता विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा करेंगे।

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