कपड़े से रोक रहे 38 एमजीडी का लीकेज, क्षमता से अधिक पानी लेने पर फूट रही लाइनें

भोपाल (रामयश केवट)। गर्मी शुरू होते ही जैसे-जैसे पानी की मांग ज्यादा बढ़ रही है, वैसे ही शहर में बिछी पाइप लाइनें जवाब देने लगी हैं। निगम के पास पानी होने के बाद भी पाइप लाइनें फूटने के कारण सप्लाई बाधित हो रही है। यदि ऐसे ही लाइनें फूटती रहीं तो आगामी दिनों में शहर में पेयजल संकट और गहरा जाएगा।

बता दें कि गत 22 मार्च को निगम ने कोलार पाइप लाइन में दो स्थानों के लीकेज को सुधारने के लिए दो दिन सप्लाई बंद की थी। निगम ने एकांत पार्क के पास वॉल्व को बदला गया और बोर्ड ऑफिस चौराहे के पास लीकेज को दुरुस्त किया गया। इस पर करीब 10 लाख खर्च कर दिए गए। बताया जाता है कि वॉल्व में बेल्डिंग ठीक से नहीं होने से यहां से पानी की बर्बादी अभी भी जारी है। इसके साथ ही कजलीखेड़ा के पास भी एक नया लीकेज हो गया है। जिसे बनाने के लिए फिर से निगम को शटडाउन लेना होगा। जिससे अब फिर जनता को पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा।

इसलिए बार-बार फूट रही लाइनें

नगर निगम की कोलार पाइप लाइन 35 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है, जो अपनी औसत उम्र पार कर चुकी है।

इसमें रोजाना 34 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पानी उठाने की क्षमता है। लेकिन नगर निगम पिछले चार

महीनों से 38 एमजीडी पानी कोलार डेम से उठा रहा है। क्षमता से अधिक पानी लेने के कारण पाइप लाइन में

दबाव बढ़ गया है, जिसके कारण लाइनें बार-बार फूट रही हैं।

पानी की बर्बादी का गणित

एक व्यक्ति को रोज 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। एक एमजीडी (4546090 लीटर) पानी से साढ़े

33 हजार लोगों की आपूर्ति होती है। लीकेज से प्रतिदिन बर्बाद हो रहे 15 एमजीडी पानी को बचाएं तो प्रति वर्ष 18 करोड़ 41 लाख लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है। इस गर्मियों में करीब 15 एमजीडी पानी की जरूरत होगी।

शहर के 17 जोन में चलेंगे टैंकर

निगम गर्मी में पेयजल संकट से निपटने शहर के 17 जोन में टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई की तैयारी है। इसके लिए निजी टैंकर अनुबंध किए जाएंगे। इस पर निगम 50 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करेगा। यह स्थिति जून आखिर तक बनी रहेगी। बारिश होने के बाद स्थिति में सुधार होगा। कोलार और होशंगाबाद रोड क्षेत्र में स्थिति ज्यादा खराब

जोन 18 और 19 का अधिकांश हिस्सा पहले से ही टैंकरों पर निर्भर हैं। इसमें होशंगाबाद रोड, मिसरोद, कोलार क्षेत्र

शामिल हैं। कोलार में केरवा से पानी सप्लाई के लिए रोजाना 26 मिलियन लीटर पानी सप्लाई के लिए 52.10 करोड़

रु से काम चल रहा है। इस गर्मी में यह पानी कोलारवासियों को नहीं मिलेगा। कोलार में 20-20 लाख लीटर की पांच

टंकियों में से दो टंकियां ही बन पाई हैं।

पानी पर्याप्त पर मैनेजमेंट गड़बड़

– निगम सूत्रों के मुताबिक पेयजल संकट ने निपटने के लिए निगम 2 फरवरी से कार्ययोजना बना रहा है। इसके लिए शहर के जल प्रबंधन के लिए निगम अनुभवी इंजीनियरों के बजाए नए इंजीनियरों को जिम्मेदारी सौंप दी है। जिससे पानी का मैनेजमेंट सिस्टम बिगड़ गया है।

– शटडाउन लेने के बाद लोगों को पानी की समस्या न हो इसके लिए टैंकरों से सप्लाई की जाती है, लेकिन यह टैंकर वीआईपी क्षेत्रों में घूमते हैं आम आदमी तक पहुंचते ही नहीं। टैंकरों का रूट चार्ट नहीं बनाया जाता।

– शहर में कोलार, नर्मदा और बड़े तालाब को मिलाकर रोजाना 104 एमजीडी पानी आता है। जो पर्याप्त है। लेकिन कहीं देर तक पानी बहकर बर्बाद हो रहा है तो कहीं पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है। डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को दुस्र्स्त

नहीं कर पाए।

इनका कहना है

क्षमता से ज्यादा पानी लेने के कारण कोलार पाइप लाइन में लीकेज की समस्या नहीं हो रही है। बल्की भारत टाकीज के पास लीकेज के कारण यह दिक्कत आई थी। जो नया लीकेज है इसकी जानकारी मुझे नहीं है, इसे

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