भारत-चीन के बीच पैदा हुए तनाव भारत ने चीन को दिया फिर झटका, दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर प्रोजेक्ट से चीनी कंपनी बाहर

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच पैदा हुए तनाव के बाद केंद्र सरकार का चीन के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने का सिलसिला जारी है। मंत्रालय ने गत दिवस दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर में ठेका हासिल कर चुकी चीन की दो कंपनियों के ठेके रद करते हुए लेटर ऑफ अवॉर्ड देने से मना कर दिया है। बतातें है कि उक्त दोनों ठेके को एल-2 (कम से कम बोली लगाने वाली दूसरे स्थान की कंपनी) कंपनी को दिया जाएगा।इस क्रम में सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रयोग होने वाले पावर टिलर व उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने सरकार के महत्वाकांक्षी ग्रीन फील्ड दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर परियोजना में दो चाइनीज कंपनियों को ठेके देने से मना कर दिया है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों साफ कहा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में चाइनीज कंपनियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि किसी चाइनीज कंपनी को ठेका मिल गया है, तो उसे रद्द कर पुन: टेंडर जारी किए जाएंगे अथवा लोवेस्ट-दो (एल-2) कंपनी को ठेका दिया जाएगा।

इसी कड़ी में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने गत दिवस अधिसूचना जारी करते हुए कृषि क्षेत्र में प्रयोग होने वाले पावर टिलर व उसके उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है। विदित हो कि बड़े पैमाने पर चीन से पावर टिलर आयात किए जाते हैं। चीन से आयात होने वाले पावर टिलर भारत के मुकाबले 30 से 60 हजार रुपए तक सस्ते होते हैं। वर्तमान में पावर टिलर बाजार में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी तक है। देश में सालाना पावर टिलर की औसतन बिक्री 35 से 40 हजार होती है। पावर टिलर का प्रयोग बड़ी जोत वाले किसान अधिक करते हैं।

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