मजदूर बनकर अनिल ने की थी प्रवीण सोमानी समेत पांच उद्योगपतियों की रेकी

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रायपुर। बिहार के वैशाली जिले के कुख्यात बदमाश पप्पू चौधरी ने पूरी तैयारी से रायपुर के उद्योगपति प्रवीण सोमानी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पांच बड़े कारोबारियों का अपहरण कर करोड़ों की फिरौती वसूलने का प्लान सूरत जेल में बनाया था। पप्पू ने तय कर लिया था कि जेल से बाहर निकलने के बाद अपहरण करना है। करीब पांच माह पूर्व जब पप्पू जेल से बाहर आया तो उसने गूगल पर सर्च कर छत्तीसगढ़ के उन पांच उद्योगपतियों की प्रोफाइल खंगाली। चूंकि रायपुर में उसका रिश्तेदार अनिल चौधरी पहले से था, इसलिए उसने पहले स्टील कारोबारी प्रवीण सोमानी को ही उठाने का फैसला किया। यह खुलासा पूछताछ में मूलतः बिहार निवासी और रायपुर के विधानसभा इलाके के दोंदेकला में सपरिवार रह रहे सरगना पप्पू के रिश्तेदार अनिल चौधरी ने की है।
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अनिल ने बताया कि पप्पू के कहने पर तीन महीने तक उसने दैनिक मजदूर बनकर सोमानी समेत पांच बड़े कारोबारियों की रेकी की थी। घर से लेकर ऑफिस तक हर बात की जानकारी जुटाई। इसके बाद आठ जनवरी को पप्पू ने ओडिशा, बिहार, उत्तरप्रदेश, गुजरात और कर्नाटक के बदमाशों के साथ ईडी अफसर बनकर प्रवीण का अपहरण किया। हालांकि पुलिस ने उन कारोबारियों के नाम को गुप्त रखा है, जिनका अपहरण गिरोह करने वाला था।

अनिल चौधरी बिहार से 15 साल पहले खरोरा थाना क्षेत्र के बंगोली गांव में आया था। वह डीजल चोरी कर बेचने का काम करते हुए बंगोली मेन रोड पर लाखों की जमीन खरीदी और पिरदा गांव में आलीशान मकान बनवाया। हाउसिंग बोर्ड कालोनी दोंदेकला में उसने सात साल पहले लाखों की लागत से तीन मंजिला मकान बनवाया। वर्तमान में वह ट्रांसपोर्टिंग का काम कर इसी मकान में पत्नी, बच्चों, दो भाइयों के साथ रह रहा है। फिलहाल यहां पर उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। अनिल और मुन्नाा नाहक को शुक्रवार को कोर्ट में पेशकर पुलिस ने विस्तृत पूछताछ करने के लिए दोनों को पांच दिन की रिमांड लिया है।

पप्पू चौधरी मूल रूप से वैशाली जिले के बीहड़ क्षेत्र गंगा नदी के दीयरा किनारे स्थित ग्राम मथुरा गोकुला थाना बीदूपुर का निवासी है। उसने बीदूपुर स्थित मजलिसपुर पंचायत के गोपालुपर घाट में नया आलीशान मकान भी बनाया है। बिहार पुलिस द्वारा उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पप्पू चौधरी का एक और नाम गौरव कुमार बताया जा रहा है। उसने अपने आधार कार्ड से लेकर अन्य सभी पहचान से जुड़े कागजात को गौरव नाम से तैयार कर रखा है, ताकि पुलिस के घेरे में आने से बच सके।

पुलिस का दावा है कि उप्र के अंबेडकर नगर और फैजाबाद के बीच कलसी के पास झोपड़ी से प्रवीण सोमानी को मुक्त कराया गया। सूत्रों की मानें तो रायपुर पुलिस और बिहार एसटीएफ को सोमानी का क्लू तब मिला जब उसने गौरव, नालंदा के एक अपराधी और गर्दनीबाग के चंदन सोनार के गुर्गे को उठाया। उससे पूछताछ के 24 घंटे बाद ही उद्योगपति का सुराग मिल गया था।

प्रवीण सोमानी की बरामदगी को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं, जिनका जवाब नहीं मिल सका है। अगर उठाए गए संदिग्धों की मदद से सोमानी की सूचना मिली तो फिर उनके जरिए पप्पू समेत गिरोह के आठ बदमाशों को पुलिस क्यों नहीं गिरफ्तार कर सकी? जिस झोपड़ी में कारोबारी को बंधक बनाकर रखने की बात कही गई, वहां पुलिस ने पहुंच कर घेराबंदी की तो फिर अपहरणकर्ता फरार कैसे हो गए? सूत्रों की मानें तो सोमानी के घर का एक सदस्य भी रायपुर पुलिस के साथ पटना गया था। सोमानी को आजमगढ़ में रखा गया था। बाद में उन्हें अंबेडकर नगर और फैजाबाद स्थित गांव में छोड़ा गया था।

देश भर में अपहरण का किंगपिन कुख्यात गैंगस्टर चंदन सोनार का पप्पू चौधरी पहले राइट हैंड हुआ करता था। चंदन सोनार, अमरजीत उर्फ बबलू, पप्पू चौधरी समेत अन्य ने मिलकर छह साल पहले गुजरात के अरबपति कारोबारी हनीफ हिंगोरा के बेटे सोहेल हिंगोरा का अपहरण किया था। इस गिरोह ने फिरौती में करोड़ों रुपये लेने के बाद ही सोहेल को हाजीपुर जिले के सोनपुर, नयागांव इलाके में रिहा किया था। बाद में चंदन सोनार, पप्पू चौधरी, अमरजीत समेत अन्य गिरफ्तार होकर गुजरात के सूरत जेल में बंद रहे। जेल से छूटने के बाद चंदन सोनार की तरह पप्पू भी अपहरण की योजना बनाने लगा। सूत्रों का दावा है कि चंदन गिरोह ने अब तक जितने भी अपहरण किए हैं, सबसे फिरौती वसूलकर ही छोड़ा है। गिरोह ने किसी कारोबारी की हत्या भी नहीं की है। ऐसे में रायपुर पुलिस का यह दावा कि बिना एक रुपये दिए सोमानी को छुड़ाकर लाए हैं, इसे लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चा है।

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