भाजपा में शामिल हो सकती हैं निदा खान, उत्तराखंड के एक मंत्री से की मुलाकात

तीन तलाक और हलाला के खिलाफ आवाज उठाने वाली निदा खान को भाजपा हाईकमान से ऑफर मिला है। उन्हें पीड़िताओं की लड़ाई लड़ने के लिए महत्वपूर्ण पद देने की तैयारी है।

बरेली : तीन तलाक और हलाला के खिलाफ आवाज उठाने वाली आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान को भाजपा से ऑफर मिला है। अब वह फिर बरेली ही नहीं बल्कि देशभर की तीन तलाक व हलाला पीड़िताओं की लड़ाई लड़ेंगी। भाजपा हाईकमान की ओर से उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपने की पेशकश की गई है। मंगलवार को उन्होंने उत्तराखंड की सरकार में मंत्री रेखा आर्या से मुलाकात की।

सूत्रों की माने तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू से निदा की फोन पर बात भी हुई। इसमें उन्होंने निदा को पीड़िताओं की लड़ाई लड़ने के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफार्म देने की बात कही है। निदा खान ने भी इस बात को स्वीकारा कि वहां भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात व बात भी हुई है। उत्तराखंड में मंत्री रेखा आर्या के बुलावे पर ही वह उनसे मिलने देहरादून गई थीं।

निदा ने बताया कि करीब एक घटा तक मंत्री रेखा आर्या से उनकी बातचीत चली। इसके बाद रेखा आर्या ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस मुलाकात से अवगत कराया है। पार्टी या सरकार में कोई ओहदा दिए जाने के सवाल पर निदा ने कहा कि इस संबंध में कुछ नहीं कह सकती। पर महिलाओं के हक में जो काम करने को तैयार होगा। मैं उसके साथ हूं। चर्चा है कि उन्हें महिला आयोग या फिर राज्य के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

कौन हैं निदा : निदा खान दरगाह आला हजरत प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खा सुब्हानी मिया के छोटे भाई अंजुम मिया के बेटे शीरान रजा खा की पूर्व पत्‍‌नी हैं। उनके शौहर ने तलाक दे दिया है। यह प्रकरण कोर्ट में चल रहा है। इसके बाद निदा ने आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी बनाई है, जिसके बैनर तले वे तलाक पीड़िताओं के हक की आवाज बुलंद कर रही हैं। ससुर के खिलाफ हलाला का आरोप लगाने वाली पीड़िता की लड़ाई लड़ने के कारण उनके खिलाफ इस्लाम से खारिज करने का फतवा जारी कर दिया गया था। साथ ही उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया था। जिस पर पूरे देश में बहस शुरू हो गई थी।

यह था मामला : निदा खान के खिलाफ फतवा मुफ्ती अफजाल रजवी ने जारी किया था। उनसे शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने सवाल किया था-जो हिंदा (महिला) कुरान व हदीस में जिक्र होने के बाद हलाला का इन्कार करे और उसे महिलाओं पर जुल्म करार दे, उसके लिए शरीयत का हुक्म बया किया जाए। जवाब में कहा गया था कि ऐसी महिला इस्लाम से खारिज हो जाएगी। वह तौबा नहीं करती है तो उससे हर तरह के ताल्लुकात तोड़ लिए जाएं। बीमार पड़े तो देखने न जाएं और मर जाए तो जनाजे में शिरकत नहीं करें। यहा तक कि कब्रिस्तान में दफन होने के लिए जमीन भी न दें।

RO-11436/55

11359/79

11363/40

Recommended For You

About the Author: reporter