भूपेश सरकार में कवासी-डहरिया का बढ़ा कद, बस्तर-सरगुजा की सौंपी जिम्मेदारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रभारी मंत्रियों के जिलों में बड़ा फेरबदल किया है। बस्तर में आदिवासी आंदोलन से निपटने के दौरान हुई सरकार की किरकिरी का असर फेरबदल में देखने को मिला। बस्तर से इकलौते मंत्री कवासी लखमा को बस्तर संभाग के पांच जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर का प्रभारी मंत्री बनाया गया है।

इससे पहले कवासी धमतरी और महासमुंद के प्रभारी थे। सरकार और संगठन के करीबी शिव डहरिया को मंत्री टीएस सिंहदेव के सरगुजा संभाग के जिलों का जिम्मा सौंपा गया है। डहरिया के पास पहले सरगुजा और कोरिया का जिम्मा था। फेरबदल में उनको सरगुजा, बलरामपुर, रामानुजगंज, सूरजपुर का प्रभार दिया गया है। कोरिया जिले में स्थानीय विधायक से विवाद के कारण डहरिया के प्रभार को वापस लिया गया है।

कवासी के महासमुंद और डहरिया के कोरिया का प्रभार अब ताम्रध्वज साहू को दिया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्चुअल लोकार्पण और सौगात के दौरान प्रभारी मंत्रियों और कलेक्टरों के कामकाज की रिपोर्ट ली थी। इसके बाद यह बदलाव किया गया है।

मुख्यमंत्री को फीडबैक मिला था कि प्रभारी मंत्री जिलों का दौरा नहीं कर रहे हैं। कोरोना संकट के दौरान लंबे समय तक प्रभारी मंत्रियों ने जिले की सुध तक नहीं ली। नए फेरबदल में मंत्रियों को अपने जिले के पास के जिलों का प्रभार दिया गया है। अनिला भेंड़िया को कांकेर व धमतरी का प्रभारी बनाया गया है, जबकि पहले उनके पास बेमेतरा और कवर्धा का प्रभार था।

टीएस सिंहदेव के एक जिले को कम करते हुए बेमेतरा, कबीरधाम का प्रभारी बनाया गया है। पहले सिंहदेव के पास जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार और मुंगेली का जिम्मा था। जांजगीर-चांपा में कलेक्टर का विवाद सुर्खियों में था। उमेश पटेल को बलौदबाजार- भाटापारा, बालोद, जशपुर का प्रभारी बनाया गया है। उमेश के प्रभार वाले जिले तीन दिशाओं में हैं। सरकार में मंत्री बनने के बाद से उमेश का फोकस रायगढ़ और अपनी विधानसभा में ज्यादा था। ऐसे में उमेश के लिए प्रभार जिलों की मानिटरिंग चुनौतीपूर्ण होगा।

चौबे और अकबर का क्यों घटा जिला

मुख्यमंत्री के सबसे करीबी माने जाने वाले और सरकार के प्रवक्ता रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर के प्रभार जिलों में कटौती की चर्चा है। सियासी गलियारे में यह सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर इनके जिलों में कटौती क्यों की गई। अकबर से राजनांदगांव का प्रभार लेकर अमरजीत भगत को दिया गया है। राजनांदगांव को सियासी दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह विधायक हैं। भगत के पास पहले जशपुर और बालोद का प्रभार था। जशपुर में ही भगत के बेटे की जमीन का विवाद सामने आया था।

टेकाम को जगदलपुर की जगह रायगढ़, जयसिंह को जांजगीर

मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को रायगढ़, कोरबा का प्रभारी बनाया गया है। टेकाम के पास पहले जगदलपुर का प्रभार था, लेकिन उनकी सक्रियता कम नजर आई। गुरु रूद्र कुमार को मुंगेली, सुकमा का जिम्मा दिया गया है। पहले उनके पास तीन जिले कांकेर, नारायणपुर और कोंडागांव का प्रभार था। जयसिंह अग्रवाल को बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, गौरेला-पेंड्रा- मरवाही का जिम्मा दिया गया है। पहले बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा का प्रभार था। जयसिंह भी बस्तर के प्रभार जिले के दौरे पर सक्रिय नहीं थे।

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