टमाटर से कैचअप बनाने सिमगा में मेगाफूड पार्क शुरू, सड़क पर फेंकने की बजाए यहां बेच सकेंगे

छत्तीसगढ़ में टमाटर की पैदावार करने वाले किसानों के लिए राहतभरी खबर है। अब उन्हें अधिक उत्पादन होने पर या रेट कम मिलने पर टमाटर सड़क पर फेंकना नहीं पड़ेगा। अब किसान अपना टमाटर सिमगा में बने मेगाफूड पार्क में बेच सकते हैं। जहां टमाटर का कैचअप बनाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के किसानों के सामने बड़ी समस्या रहती थी, उन्हें दाम नहीं मिलने पर टमाटर सड़कों पर फेंकना पड़ता था। अब इसके लिए सिमगा के मेगाफूड पार्क में टमाटर से कैचअप बनना शुरू हो गया है। बीते तीन साल से इसका निर्माण चल रहा था। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से इंडस बेस्ट फूड मेगा पार्क लगाया गया है। 124 करोड़ रुपए की लागत से इस फूड पार्क को केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी दी है। कंपनी के अफसरों ने बताया कि इससे धमधा, बेरला समेत आसपास के किसानों को राहत मिलेगी।

फूड पार्क के लिए तीन जिलों में कलेक्शन सेंटर

मेगाफूड पार्क में कच्चा माल लाने के लिए तीन जिलों में प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। बेरला (दुर्ग), अभनपुर (रायपुर) और रतनपुर (बिलासपुर) में 4-4 एकड़ में प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर होंगे। वहां एक से 10 हजार टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज एंड ड्राई वेयर हाउस भी बनाए गए हैं। किसान अपने उत्पाद टमाटर, पपीता आदि की ग्रेडिंग और शार्टिंग करवाकर ले जा सकेंगे।

यहां प्राकृतिक तरीके से पकाए जाएंगे फल

वर्तमान में फलों को पकाने के लिए खतरनाक केमिकल एथलीन पानी में डूबोया जाता है, लेकिन मेगाफूड पार्क में केला, आम, बिही आदि फलों को प्राकृतिक तरीके से पकाने का इंतजाम होगा। पार्क तक टमाटर लाने वालों को मदद राशि मिलेगी।

मेगाफूड पार्क में वेस्ट वाटर का भी किया जाएगा यूज

इस मेगाफूड पार्क में यूरोपियन देशों से अत्याधुनिक उपकरण इंपोर्ट की गई है। यहां संयंत्र चलाने के लिए 28 लाख लीटर पानी रोजाना उपलब्ध रहेगा। यहां उपयोग होने वाले पानी का ट्रीटमेंट कर पुनः उपयोग भी किया जाएगा। ईटीपी (इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया गया है। जहां 12 से 24 लाख लीटर वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट करेंगे।

जूस निकालने के लिए सबसे बड़ा संयंत्र

इस मेगाफूड पार्क में कई तरह के फलों के जूस और पल्प निकालने के संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इसमें रोजाना 400 टन टमाटर से पल्प, कैचअप और जूस निकालने के उपकरण होंगे। लौकी, आंवला व ब्लूबेरी (नई फसल) के क्लीयर जूस निकालने 200-200 टन क्षमता के संयंत्र लगाए जा रहे हैं। आम, पपीता और बिही (गुवावा) के पल्प भी निकाले जाएंगे।

400 टन प्रतिदिन कैचअप की है यूनिट

फूड पार्क से जुड़े अफसरों की माने तो यह यूनिट टमाटर किसानों की समस्या का हल करेगी। अभी 50 टन टमाटर की आवक है। जबकि क्षमता 400 टन प्रतिदिन की है। कंपनी चार रुपए किलो की दर से हाइब्रिड टमाटर खरीद रही है। वहीं 3 रुपए की दर से देशी टमाटर खरीदेगी। साथ ही परिवहन के लिए अलग राशि देने का प्रावधान किया गया है।

सिमगा स्थित मेगा फूड पार्क में टमाटर से कैचअप बनाने का काम शुरू हो गया है। इसकी क्षमता 400 टन है।

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