शासन का निर्णय: श्रम न्यायालयों में अब सुनवाई और फैसले जल्द हो सकेंगे, नई अधिसूचना जारी

श्रम न्यायालयों में अब प्रकरणों पर सुनवाई व फैसले जल्द होंगे क्योंकि राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना को निरस्त कर नई अधिसूचना जारी की गई है। पूर्व के अधिसूचना में श्रम न्यायालय में आने वाले औद्योगिक विवादों की सुनवाई व फैसले की अधिकारिता ऐसे न्यायाधीशों को दी गई थी। जिन्होंने श्रम न्यायालयों में 7 साल तक पीठासीन अधिकारी की सेवा अवधि पूर्ण कर ली है। राज्य में जगदलपुर व रायगढ़ को छोड़कर अन्य किसी भी जिले में ऐसे न्यायाधीश नहीं थे जिन्होंने इस अवधि की सेवा श्रम न्यायालय में दी हो। इसलिए कोरबा समेत अन्य जिलों में श्रम मामलों से जुड़े मामलों की सुनवाई व फैसला अटक रहा था। खासकर औद्योगिक जिला होने के कारण कोरबा में ऐसे ज्यादातर मामले पेंडिंग हो गए थे।

इसके लिए जिला अधिवक्ता संघ के सचिव नूतन सिंह ठाकुर ने श्रम विभाग की अधिसूचना को अवैधानिक व न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय व छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर सचिव ठाकुर ने श्रम विभाग की अधिसूचना के कारण श्रम न्यायालयों में कार्रवाई बाधित होने तथा विवादों के निपटारे में लंबा समय लगने की बात कही थी। छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव सुबोध कुमार सिंह ने 24 जनवरी 2020 को नई अधिसूचना जारी की है। नई अधिसूचना में श्रम न्यायालय में 7 वर्ष की सेवा अवधि की बाध्यता को दूर कर दिया गया है। अब वे सभी न्यायाधीश जिन्होंने जिला न्यायाधीश या अपर जिला न्यायाधीश के रूप में 3 वर्ष की सेवा कर चुके हैं अथवा 7 वर्ष तक न्यायिक पद धारण करने वाले जज श्रम न्यायालयों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे और प्रकरणों का निराकरण कर सकेंगे।

जिला अधिवक्ता संघ के सचिव नूतन सिंह ठाकुर ने बताया कि श्रम न्यायालयों में पूर्व की अधिसूचना के कारण औद्योगिक व श्रम विवाद के मामले पेंडिंग हो रहे थे। निर्धारित बाध्यता के कारण श्रम न्यायालय को न्यायाधीश ही नहीं मिलते ऐसे में प्रकरणों में वर्षों तक सुनवाई व फैसला नहीं आता। इसलिए अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई थी। अब शासन द्वारा जारी अधिसूचना से जल्द सुनवाई और फैसले होंगे। इससे पक्षकारों बड़ी राहत मिलेगी। अधिवक्ताओं ने इसका स्वागत किया है।

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