राजस्थान ने स्कूल की किताबों में संविधान की प्रस्तावना को किया अनिवार्य, छत्तीसगढ़ में सभी शैक्षणिक संस्थानों में संविधान पर होगी चर्चा

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने स्कूल की किताबों में संविधान की प्रस्तावना को अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने यह फैसला युवाओं में भारतीय संविधान के बारे में जानकारियां बढ़ाए जाने को लेकर किया है। सीएम अशोक गहलोत के ऐलान के बाद प्राइमरी और सेकेंड्री एजुकेशन विभाग के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), गोविंद सिंह दोतास्रा ने राज्य के टेक्स्टबुक बोर्ड को निर्देश दिया है कि कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी टेक्सबुक के पहले पन्ने पर संविधान की प्रस्तावना छपवाई जाए।

इधर छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में बच्चों के लिए देश के संविधान पर चर्चा को अनिवार्य कर दिया है। बीते शुक्रवार को इस संबंध में एक खत जारी कर कहा गया है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में बच्चे एक घंटा अनिवार्य रूप से भारतीय संविधान पर चर्चा करेंगे। यह चर्चा हर सोमवार को किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग की तरफ से जो खत जारी किया गया है उसमें यह भी बताया गया है कि किस हफ्ते संविधान की किस अध्याय पर चर्चा होगी। बता दें कि शिक्षा विभाग के निर्देश के मुताबिक इस हफ्ते संविधान की प्रस्तावना पर चर्चा होगी।

आपको बता दें कि पिछले साल 1 जून को राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि ‘संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख टेक्स्टबुक के पहने पन्ने पर होना चाहिए। ताकि संविधान के प्रति उत्तरादायित्व की भावना छात्रों में विकसित हो सके।’

इधर इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि ‘टेक्स्टबुक में संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करना अच्छी बात है। लेकिन कांग्रेस इसके जरिए सियासी फायदा उठाना चाहती है। एक तरफ पार्टी नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रही है जो संवैधानिक तरीके से लागू किया गया है और अब वो टेक्स्टबुक में संविधान के प्रस्तावना की बात कर रही है। पहले उन्हें खुद संविधान का पालना करना चाहिए।’

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