छग पाठ्य-पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने करोड़ों का ठेका देकर सरकार को लगाया चुना

रायपुर। आज शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को ज्ञापन सौंपा गया ज्ञापन में कहाँ गया की पाठ्य पुस्तक निगम में लगातार हर मामले में करोड़ों के घोटाले कर शासन को हानि पहुंचाई जा रही है तथा पापुनि के महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी स्वयं इन घोटालों के रचनाकार है। मंत्री से निवेदन किया की अशोक चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से छ.ग. सिविल सेवा अधिनियम (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) 1966 के भाग 4 की धारा 9(1) (a) के तहत निलंबित किया जावे घोटालों पर जल्द कार्यवाही न की गई तो ये घोटाले छ.ग. की जनपक्षीय कांग्रेस सरकार के लिए भी भविष्य में बदनामी व परेशानी का कारण बन सकते है। मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना एवं कार्यवाही का आश्वासन दियाखेद का विषय है कि नियम विरूद्ध व निविदा प्रक्रिया का धता बताकर अपने संबंधियों, रिश्तेदारों तथा दलालों की दाग़ी फ़र्मों को ठेका देकर शासन को चूना लगाने की जांच रिपोर्ट आ जाने के बावजूद भी चतुर्वेदी पर अभी तक कार्यवाही नही हो पाई है, जबकि उनके विरूद्ध जांच समिति ने एक मामलें में पुलिस अन्वेषण तथा FIR किए जाने की अनुशंसा भी की गई है। इसके बावजूद भी वे महाप्रबंधक पद पर लगातार बने हुए हैं तथा जांच को प्रभावित व दस्तावेजों में हेर-फेर कर रहे है।

आज ये भी उजागर किया गया कि फ़रवरी 2018 में अशोक चतुर्वेदी ने पूर्व प्रबंध संचालक के फर्जी हस्ताक्षर कर एक मामलें में गलत तरीके से निविदा जारी की गई थी । इसकी जांच में पुष्टि भी हो चुकी है। वर्तमान आयुक्त, बिलासपुर संभाग तथा पूर्व प्रबंध संचालक संजय अलंग द्वारा लिखे पत्र क्रमांक/1285/स्टेनो/2020 बिलासपुर दिनांक 26 जून 2020 में संजय अलंग ने अवगत कराया है कि:-

विविध मुद्रण शाखा की नस्ती में 51वीं बैठक 28.02.2018 के एजेंडा क्रमांक 13 से संबंधित कार्यवाही विवरण व उपस्थिति पत्रक के प्रथम पृष्ठ पर अंकित प्रबंध संचालक के हस्ताक्षर उनके द्वारा नही किए गए है। कार्यकारिणी की 52वीं बैठक दिनांक 19.04.2018 में उल्लेखित पालन प्रतिवेदन के अंत में पृष्ठ क्रमांक 07 पर किए हस्ताक्षर उनके ( संजय अलंग के) द्वारा नही किये गए है।

विविध मुद्रण कार्य की एक नस्ती में नोटषीट में श्री संजय अलंग के हस्ताक्षर के नीचे लिखे ‘‘आगामी कार्यकारिणी में रखें’’ व ‘‘अनुमोदित’’ की हैंडराइटिंग भी संजय अलंग की हैंडराइटिंग नही है। अलंग ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि ये दोनो वाक्य उन्होने नही लिखा है। संजय अलंग ने इस प्रकरण में उचित जांच कर कार्यवाही करने को भी लिखा है।

इस प्रकरण में पापुनि के महाप्रंबधक अशोक चतुर्वेदी ने कूट रचित दस्तावेज तथा अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर मनमाने दर पर 6 करोड़ 55 लाख 48 हज़ार 598 रूपये का ठेका अपने चहेते दाग़ी फर्म रिश्तेदार मेसर्स होप इंटरप्राइजेंस, सुंदरनगर, रायपुर को जारी किया तथा स्कूलों के लिए ग्रीनबोर्ड, रेट्रो रिफलेक्टिव साइन बोर्ड लगाने की निविदा की फाइल में फर्जी हस्ताक्षर व कूटरचित दस्तावेज बनाकर शासन को करोड़ो के राजस्व की हानि पहुंचाई व घपला किया है। अशोक चतुर्वेदी ने अन्य दर्जनों मामलों में घपला किया है तथा इनके विरूद्ध की गई जांच में भी कई मामलों में जांच समिति ने घोटालों की पुष्टि की है।

मंत्री टेकाम से माँग की गई की उक्त मामलों की रौशनी में यह आवश्यक है कि तत्काल प्रभाव से अशोक चतुर्वेदी को निलंबित किया जाए, उनके विरूद्ध एफआईआर किया जाए तथा सभी मामलों की आपराधिक जांच हेतु पुलिस अन्वेषण कराया जाए। अशोक चतुर्वेदी आदतन अपराधी है तथा भाजपा शासनकाल से ही वे विभिन्न मामलों में लगातार घपले करते आ रहे है। पापुनि के भी कई कर्मचारी व अधिकारी इनके दबाव में हैं तथा डरे हुए है। चतुर्वेदी लगातार दस्तावेज गायब कर रहे है। इनके विरूद्ध कई मामलों में जांच हुई है तथा दर्जनों मामले लंबित है। कई मामलों में जांच समितियों ने उनके विरूद्ध रिपोर्ट भी दी है। जिसमें स्पष्ट रूप से इन्हे दोषी पाया गया है।

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