अमेरिका फलीस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने के लिए तैयार, ईरान प्रस्ताव से नाराज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इजरायल और फलस्तीन के बीच वर्षों से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें पहली बार फलस्तीन को एक देश का दर्जा देते हुए पूर्वी येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की बात कही गई है। इजरायल ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया है जबकि कुछ अरब देशों ने इसका विरोध किया है।

ट्रंप का कहना है कि येरुशलम इजरायल की अविभाजित राजधानी बना रहेगा। ट्रंप ने इसके लिए एक समिति गठित की है, जो इस योजना की रूपरेखा तैयार करेगी। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप की प्रस्तावित मध्य पूर्व शांति योजना के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक पर इजरायल की बस्तियों को मान्यता देगा। बदले में इजरायल को फलस्तीन की राजधानी पूर्वी येरुशलम में बनाने पर सहमति देनी होगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए दोनों देशों के पास यह बड़ा मौका है।

ट्रंप ने पहले भी कई बार इजरायल और फलस्तीन के बीच शांति समझौते के लिए प्रस्ताव पेश करने की बात कही, लेकिन उनकी योजना पिछले दो वर्षों से टल रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को मध्य-पूर्व शांति योजना पेश की है। इसके लिए उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रतिद्वंद्वी तथा पूर्व सेना प्रमुख बैनी गैंट्ज बातचीत के लिए व्हाइट हाउस बुलाया। इस कदम की आलोचना करने वाले फलस्तीनियों को मंगलवार की बैठक में नहीं बुलाया गया। फलस्तीन ने इस योजना को नकार दिया।

दोनों देशों के बीच विवाद
वर्ष 1993 में हुए एक शांति समझौते के मुताबिक, येरुशलम की स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। फलस्तीन का कहना है कि इजरायल ने उसकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रखा है। वर्ष 1967 के बाद से ही इजरायल ने यहां कई निर्माण कर लिए हैं। अभी पूर्वी येरुशलम में करीब दो लाख यहूदियों के घर हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह गलत है, जिसे इजरायल नहीं मानता।

ब्रिटेन ने सकारात्मक कदम बताया
प्रस्ताव पेश करने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से फोन पर बात की। इसकी जानकारी देते हुए ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह प्रस्ताव सकारात्मक कदम है। इससे इस क्षेत्र में शांति आएगी।

ईरान ने प्रस्ताव खारिज किया
ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि इस बातचीत में फलस्तीन शामिल नहीं था और इजरायल व अमेरिका इस मामले में सौदेबाजी कर रहे हैं। दोनों देश जबरदस्ती इसे लागू करना चाहते हैं जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

नतन्याहू ने ऐतिहासिक अवसर बताया
ट्रंप के साथ मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता आएगी और दोनों देशों का भविष्य उज्ज्वल होगा।

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