कीर्तन, संगम में स्नान और गोष्ठी में शामिल होने के लिए पहंुचे अघोरेश्वर अनुयायी

सोगड़ा चड़िया स्थित तीन नदियों के संगम में सर्वेश्वरी समूह द्वारा अनन्य दिवस मनाया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहां संगम स्नान के लिए श्रद्घालु जुटे। अनन्य दिवस पर यहां त्रिवेणी संगम स्नान के लिए कई राज्यों से लोग आते हैं और जिले का सबसे बड़े भंडारा का आयोजन किया गया।

अनन्य दिवस को लेकर अघोरेश्वर अनुयायियों में उत्साह है। कीर्तन भजन के साथ त्रिवेणी में संगम स्नान व गोष्ठी में शामिल होने बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित झारखंड, बिहार, ओडिशा और उत्तरप्रदेश से अघोरेश्वर अनुयायी आएंगे। यहां जिले का सबसे बड़ा भंडारा भी होगा, जिसमें हजारों की संख्या में लोग खिचड़ी भोग लेने के लिए भी शामिल हुए।

गुरुवार को आयोजन होने से लोगों में और भी उत्साह देखने को मिल रहा है। डॉ. बीएन उपाध्याय ने बताया कि मान्यता है कि इसी दिन सर्वेश्वरी समूह और बाबा भगवान राम ट्रस्ट के संस्थापक अघोर संत अवधूत भगवान राम को इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम में दिव्य शक्ति प्राप्त हुई थी। तब से अनन्य दिवस के रूप में श्रद्घालु मनाते हैं।

अनन्य दिवस से तात्पर्य इसके समान कोई दूसरा दिन नहीं होने से है। गुरुवार को सोगड़ा आश्रम से 2 किलोमीटर दूर चड़िया संगम तट पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। सुबह 6 बजे अघोरेश्वर भगवान का आसन सर्वेश्वरी ध्वज के साथ भक्त टोली के साथ भजन-कीर्तन करते हुए संगम तट पर पहुंचे। संगम तट पर सर्वेश्वरी समूह का ध्वजा रोहण किया जाएगा, जिसके बाद आरती, पूजन और हवन के बाद बाद प्रसाद वितरण होगा।

दोपहर 12 बजे से लघु गोष्ठी होगी, जिसमें सभी गणमान्य लोगों के विचार एवं साधुजनों का प्रवचन होगा। दोपहर 2 बजे से प्रसाद वितरण का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। अंत में साढ़े चार बजे पूजन आरती के बाद पुनः ध्वज एवं आसन के साथ भक्तजनों की टोली वापस सोगड़ा आश्रम पहुंचेगी।

संगम तट पर तीन नदियों लावा, मधेश्वर एवं मनोरमा का संगम होता है। श्रद्घालुओं की मान्यता है कि इस स्थान को परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु ने अपने तप से जागृत कर इसे प्रयाग इलाहाबाद संगम तट के समकक्ष बनाया था। यहां पर उक्त तिथि माघ कृष्णपक्ष चतुर्दशी को स्नान करने से वही पुण्य प्राप्त होता है,जो कि संगम तट प्रयाग इलाहाबाद में स्नान करने से प्राप्त होता है। इस अवसर पर आस-पास के ग्रामीणों के साथ ही झारखंंड, बिहार और यूपी से श्रद्घालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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