महाराजा’ में हैं खूबियां, लेकिन भारी पड़ीं ये खामियां

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विनिवेश के लिए बने मंत्री समूह(जीओएम) ने भी सरकार को एयर इंडिया में अपनी हिस्सेदारी 24 फीसद तक रखने का सुझाव दिया है।

एयर इंडिया 7.7 बिलियन डॉलर के कर्ज में डूबी है और बेलआउट पैकेज की वजह से इसका संचालन हो रहा है। ऐसे में सरकार अब इस पर और पैसा लगाने के मूड में नहीं है और घाटे की भरपाई के लिए इसे बेचने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या इस स्थिति में कोई निवेशक इसे खरीदने में रुचि दिखाएगा। क्योंकि एयर इंडिया पर कर्जा काफी ज्यादा है।

इस बीच हम आपको देश की शान ‘महाराजा’ की खूबियों और खामियों के बारे में बताएंगे।

‘महाराजा’ में है ये खूबियां-

सरकार ने इसके विनिवेश की शुरुआत कर दी है। ऐसे में निवेशकों को एयर इंडिया के बेड़े में मौजूद एयरक्राफ्ट की संख्या जरूर आकर्षित करेगी। एयर इंडिया के बेड़े में 118 जहाज हैं। इंडिगो एयरलाइंस के बाद एयर इंडिया के पास ही सबसे ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं। ऐसे में जो भी कंपनी या निवेशक एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदेगा, उसे तेजी से बढ़ती एविएशन इंडस्ट्री में अपना बिजनेस बढ़ाने का मौका मिल जाएगा।

-एयरलाइंस कंपनियों को कई साल पहले नए विमानों का ऑर्डर देना पड़ता है। ऐसे में विमानों की खरीदी में लंबा वक्त लगता है। मगर एयर इंडिया में हिस्सेदारी खरीदने से कंपनी इस बाधा को आसानी से पार कर लेगी।

-एयर इंडिया सबसे ज्यादा मुसाफिरों को भारत और भारत से बाहर लेकर जाती है। ऐसे में जो निवेशक इसमें हिस्सेदारी खरीदेगा। उसे पहले से ही तैयार बाजार मिल जाएगा। वहीं उसे विदेशों में ऑपरेशन शुरू करने से पहले स्थानीय जरूरत के मुताबिक मार्केट मिल जाएगा।

– भारत के अहम एयरपोर्ट पर जगह की काफी कमी है। खासतौर पर दिल्ली और मुंबई के हवाई अड्डों पर विमानों को खड़ा करने की जगह कम है। मुंबई एयरपोर्ट पर तो हालात ऐसे हैं कि कोई भी नई फ्लाइट यहां से अब शुरू नहीं हो सकती है। मगर एयर इंडिया के पास पहले से ही मुंबई में स्लॉट मौजूद हैं। ऐसे में जो भी कंपनी इसे खरीदेगी उसे आर्थिक राजधानी मुंबई से उड़ान भरना आसान हो जाएगा।

‘महाराजा’ के सामने ये परेशानी-

घरेलू बाजार में एयर इंडिया की हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। एक दशक पहले जहां एय़र इंडिया की हिस्सेदारी 35 फीसद थी। वही आज हिस्सेदारी घटकर 12.9 फीसद है। जोकि स्पाइसजेट के बराबर आ गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने से पहले सरकार कैसे इसके कर्जे को संभालेगी, क्योंकि एक दशक से एयर इंडिया घाटे में ही चल रही है और कर्जा बढ़ता जा रहा है।

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