जब धरती के अंदर ही पिघलने लगी मशीनें

ये जो तस्वीरें आप देख रहे हैं, यह उस ‘ग्रेट होल’ की हैं, जो अब तक इंसान द्वारा पृथ्वी में सबसे अधिक गहराई तक किया गया है। इसे नाम दिया गया ‘कोला सुपरडीप बोरहोल’!

सामान्यतः धरती में छेद पानी निकालने, तेल के गहरे कुएं बनाने या प्राकृतिक गैस, खनिज आदि पाने के लिए बनाए जाते हैं। मगर इस विशाल छेद के लिए की गई खुदाई इन सबसे अलग उद्‌देश्य के साथ शुरू की गई थी। दरअसल, 70 के दशक में सोवियत रूस में यह सोचा गया कि यदि धरती को गहराई में खोदते ही जाएं तो आखिरकार कहां पहुंचेंगे? यह विचार शोध के नजरिए से तो महत्वपूर्ण था ही, धरती के रहस्यों को जानने के आकर्षण से भी भरा हुआ था।

अंततः पूरी तैयारी के बाद 24मई 1970 को सोवियत रूस के पेचेंग्स्की में स्थित कोला प्रायद्वीप में खुदाई शुरू

की गई। इसमें भारी मशीनें लगीं और महीनों खुदाई चली। जैसे-जैसे खुदाई गहरी होती गई, धरती का तापमान इतना बढ़ता गया कि असहनीय हो गया। वहां इंसान का काम करना तो दूर, मशीनें तक काम नहीं कर सकती थीं।

मशीनों के कमजोर पाट्‌र्स पिघलने लगे। अंततः 1989 में 12,262 मीटर तक जाने के बाद खुदाई रोकनी पड़ी। मगर इस अनूठे विचार ने धरती के गर्भ में छुपे रहस्यों की कई परतें खोल दीं। यह गड्‌ढा आज भी दुनिया का सबसे गहरा बोरहोल है।

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