विहिप की मांग नरेंद्र मोदी सरकार से – भंग करो अल्‍पसंख्‍यक आयोग और मंत्रालय

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार (26 जून) को गुजरात में हुई एक बैठक में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को तत्काल प्रभाव से भंग करने की मांग की। विहिप ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों से जुड़े आयोग और मंत्रालय से “अलगाववादी मानसिकता” को बढ़ावा मिलता है। गुजरात के खेड़ा जिले के वडताल में 24-25 जून को हुई विहिप की केंद्रीय शासी परिषद की बैठक में इन मांगों के साथ एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि अल्पसंख्य आयोग इस प्रकार का वातावरण बनाता है जैसे भारत में मुस्लिम व ईसाई समाज पीड़ित है।
प्रस्ताव में कहा गया है, “वास्तव में ये न केवल हिंदू समाज अपितु अन्य अल्पसंख्यकों जैसे बौद्ध व सिख समाज पर भी बर्बर अत्याचार करते हैं। इसलिए जेहादी व मिशनरी पीड़ित नहीं अत्याचारी हैं। ये अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाओं का लाभ लेकर अपने लिए सहानुभूति अर्जित करते हैं, जिससे ये अपने हिंदू विरोधी व देश विरोधी षडयंत्रों को निर्बाध रूप से चलाते रहते हैं।” विहिप ने इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से यह भी मांग की है कि संसद में अविलंब कानून लाकर राम मंदिर के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएं।
विहिप ने अपनी बैठक में तिरुपति बालाजी मंदिर एवं अन्य प्रमुख मंदिरों के प्रसाद पर जीएसटी लगाए जाने को लेकर भी चिंता जाहिर की। एक जुलाई से पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होगा। विहिप ने दावा किया कि उसने वित्त मंत्री अरुण जेटली को हिंदुओं के देवी-देवताओं के पूजा में प्रयोग होने वाले अगरबत्ती, धूप और मूर्तियों इत्यादि से जुड़ी सामग्रियों पर टैक्स न लगाने के बाबत पत्र लिखा है।
दक्षिणपंथी संगठन विहिप की स्थापना 19 अगस्त 1962 को हुई थी। इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तत्कालीन प्रमुख एमएस गोलवरकर, शिवराम शंकर आप्टे और स्वामी चिन्मयानंद ने मिलकर की थी। संगठन के अनुसार उसके 60 लाख से ज्यादा सदस्य हैं। विहिप की युवा शाखा “बजरंग दल” और महिला शाखा “दुर्गा वाहिनी” भी अक्सर अपने क्रियाकलापों और बयानों की वजह से विवाद में रहते हैं।

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