जीएसटी की पाठशाला: 30 दिनों के अंदर जारी करना होगा बिल –

सीए मनोज पी गुप्ता

नीलेश गुप्ता प्लासिटक बॉटल के निर्माता और विक्रेता है। इंदौर के सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में इनकी निर्माण इकाई है। ये जीएसटी की पाठशाला के पाठक हैं। नईदुनिया के पिछले अंक से इन्हें ये जानकारी मिली है कि जीएसटी के प्रावधानों की वजह से उन्हें अपने बिल के प्रारूप में बदला करना पड़ेगा। इस विषय में उनको ये जानकारियां चाहिए।

सवाल- मैं अपने अधिकांश ग्राहकों को ईमेल से बिल भेजता हूं। क्या जीएसटी में यह जरूरी होगा कि मैं बिल प्रिंट कर कूरियर से भेजूं?

जवाब- आप अपने ग्राहकों को ईमेल से बिल भेज सकते हैं। बेहतर यह होगा कि बिलों पर आपके डिजीटल हस्ताक्षर हों। बिल प्रिंट करके भेजना जरूरी नहीं है।

सवाल- क्या बिल जारी करने की कोई समय अवधि है?

जवाब- माल बेचने के 30 दिनों के भीतर आपको विक्रय बिल जारी करना जरूरी है। ऐसा करने से आपको आपके विक्रय का मासिक रिटर्न, जीएसटीआर 1 बनाना भी आसान होगा। साथ ही माल खरीदने वाले व्यापारी को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट शीघ्रता से मिल सकेगी।

सवाल- मुझे बिल कितनी प्रतियों में बनाना होगा?

जवाब- आपको विक्रय बिल निम्न तरह से तीन प्रतियों में बनाना होगा।

– बिल की मूल प्रति पर लिखना होगा ओरिजनल फॉर रिसीपियेंट (मूल प्रति क्रेता के लिए)

– बिल की दूसरी प्रति पर लिखना होगा डूप्लीकेट फॉर ट्रांसपोर्टर (दूसरी प्रति ट्रांसपोर्टर के लिए)

– बिल की तीसरी प्रति पर लिखना होगा टिपरलीकेट फॉर सप्लायर (तृतिय प्रति विक्रेता के लिए)

सवाल- क्या मुझे बिल क्रमांक की जानकारी रिटर्न में देना होगी?

जवाब- हां जब आप अपने विक्रय का रिटर्न जीएसटीआर-1 में बनाएंगे तब आपको आपके जारी किए गए समस्त बिल नंबर और बिल क्रमांक की जानकारी भी देना होगी।

सवाल- मूल बिल में कोई त्रुटि रह जाने पर क्या जीएसटी में रिवाइज्ड बिल जारी किया जा सकेगा?

जवाब- जीएसटी में रिवाइज्ड बिल, नियमों के तहत जारी किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में फिर से जारी किए गए बिल पर रिवाइज्ड इनवायस लिखना जरूरी होगा।

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