साइरस मिस्त्री ने बर्खास्तगी से पहले ही पत्नी को भेजा था मैसेज

24 अक्टूबर, 2016 को बैठक में साइरस को चेयरमैन के पद से हटाने का फैसला लिया गया था। इससे पहले उनसे कहा गया था कि वह या तो इस्तीफा दें या फिर उन्हें बर्खास्त करने का प्रस्ताव लाया जाएगा। मिस्त्री द्वारा गठित ग्रुप एक्जीक्यूटिव काउंसिल (जीईसी) के सदस्य रहे निर्मल्या कुमार ने यह दावा किया है।

लगभग 106 अरब डॉलर (सात लाख करोड़ रुपये) के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का कहना था कि मिस्त्री कई कारणों से बोर्ड का विश्वास खो चुके थे।

कुमार का कहना है कि बैठक से ठीक पहले होल्डिंग कंपनी के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा और बोर्ड के सदस्य नितिन नोहरिया मिस्त्री के पास गए थे। अपने ब्लॉग में कुमार ने लिखा, ‘बातचीत नोहरिया ने शुरू की। उन्होंने कहा कि साइरस जैसा कि आप जानते हैं, आपके और रतन टाटा के बीच संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं।

इसलिए टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड के समक्ष आपको टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाने का प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।’ कुमार के अनुसार मिस्त्री के सामने विकल्प रखा गया कि वह इस्तीफा दें या फिर बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव का सामना करें।

इस मौके पर शांत स्वर में रतन टाटा ने कहा कि वह माफी चाहते हैं कि बात यहां तक पहुंच गई। निर्मल्या ने लिखा, ‘मिस्त्री ने दोनों को सौम्यता के साथ कहा कि आप महानुभाव बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव पर विचार करने को स्वतंत्र हैं। मुझे जो करना है, वह मैं करूंगा।’

इस बातचीत के बाद मिस्त्री ने पत्नी रोहिका को एक एसएमएस भेजा, ‘मुझे बर्खास्त किया जा रहा है।’ इसके बाद अपना कोट पहनकर वह बैठक में चले गए। कुमार सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी के ली कांग चियान बिजनेस स्कूल में मार्केटिंग के प्रोफेसर हैं।

उन्होंने लिखा है कि बैठक में मिस्त्री की दलील थी कि इस तरह के प्रस्ताव के लिए कम से कम 15 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए। इस पर बोर्ड सदस्य और टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि अमित चंद्रा ने कहा कि ऐसे नोटिस की कोई जरूरत नहीं है। बैठक में आठ में से छह सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया।

दो सदस्य फरीदा खंभाटा (स्वतंत्र निदेशक) और इशात हुसैन (फाइनेंस डायरेक्टर) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। कुमार की मानें तो मिस्त्री को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

अगले दिन आने के सवाल पर कंपनी के सीओओ एफएन सूबेदार ने मिस्त्री से कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं। हालांकि बाद में टाटा समूह और मिस्त्री के बीच लंबी कानूनी लड़ाई की शुरुआत हुई। कुछ मामलों में यह अब भी जारी है

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