शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने की सजा कम होगी, जमानत मिलेगी, संशोधन विधेयक में किया प्रावधान

भोपाल। दुष्कर्मी को फांसी की सजा का प्रावधान करने वाली मध्यप्रदेश सरकार चाहती है कि शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले की सजा कम हो। यही नहीं सरकार की मंशा इस अपराध को जमानती करने की भी है। एक दिन पहले समाप्त हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य सरकार ने दण्ड विधि संशोधन विधेयक पेश किया। इसके तहत १२ वर्ष तक की बालिका से दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक को सदन ने हरीझंडी भी दे दी।

इस संशोधन विधेयक में और भी कई प्रावधान हैं। एक प्रावधान शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले को सजा दिलाए जाने से भी जुड़ा है। ऐसे मामले में दोष सिद्ध होने पर तीन साल कैद और जुर्माना की सजा का प्रावधान संशोधन विधेयक में किया है। जबकि, वर्तमान में इस अपराध में दोषी पाए जाने पर १० साल की जेल और जुर्माना की सजा का प्रावधान कानून में है। यानी विधेयक राष्ट्रपति की हरीझंडी मिली तो शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले को अब १० साल की बजाय तीन साल की सजा होगी। वर्तमान में यह अपराध गैर जमानती है, लेकिन विधेयक में इसे जमानती अपराध माना गया है।

यह दिया तर्क
इस अपराध में सजा कम करने के पीछे सरकार के अपने तर्क हैं। कहा जा रहा है कि इस कानून के दुरुपयोग की शिकायतें अधिक आ रही थीं, इसलिए इसे जमानती बनाया है। तर्क यह भी दिया जा रहा है कि इस अपराध को संज्ञेय बनाया जा रहा है। यानी शिकायत के साथ पुलिस सीधे कार्यवाही कर सकेगी।

दुष्कर्मी के साथ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वालों को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह भी जरूरी है कि कानून का दुरुपयोग न हो। इस अपराध को जमानती बनाए जाने के पीछे सरकार की यही मंशा रही होगी। युवक-युवती लम्बे समय साथ रहे और बाद में संबंधों में खटास आने के कारण दुष्कर्म के आरोप लगे।
– आरडी जैन, पूर्व महाधिवक्ता मध्य प्रदेश सरकार

बेटियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कड़ा कानून बनाया है। इसमें दुष्कर्मी को फांसी तक का प्रावधान है। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म संबंधी कानून के दुरुपयोग की शिकायतें अधिक थीं, इसलिए अपराध को जमानती बनाया है। तुरंत एक्शन के लिए इसे संज्ञेय की श्रेणी में रखा है।

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