सऊदी अरब के किंग सलमान ने जारी किया ऐतिहासिक शाही आदेश।

रियाद. सऊदी अरब में अब महिलाएं भी सड़कों पर गाड़ी चला सकेंगी। लोकल मीडिया के मुताबिक सऊदी अरब के किंग सलमान इसके लिए ऐतिहासिक शाही आदेश जारी किया है। इसमें महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के फैसले को मंजूरी दी गई है। रोक लगाने वाला अकेला देश था सऊदी…

– सऊदी अरब के सरकारी अल-अरबिया न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सौद ने यह ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। इसके अलावा फॉरेन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर भी इसका एलान किया गया है। ट्वीट में लिखा है, “सऊदी अरब महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत देता है।”
रोक लगाने वाला अकेला देश था सऊदी

– अब तक सऊदी अरब दुनिया का इकलौता ऐसा खाड़ी देश था, जहां महिलाओं को ड्राइविंग करने का अधिकार नहीं था। किंग सलमान के इस फैसले की दुनियाभर में तारीफ हो रही है। अमेरिका ने भी इसकी तारीफ की है।

– अमेरिका के फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन हीथर नुअर्ट ने कहा, “यूएस इस फैसले से खुश है, सऊदी अरब में ये एक सही दिशा में उठाया गया महान कदम है।”
हक के विरोध में थे मौलवी

– वुमन राइट एक्टिविस्ट्स सऊदी अरब में 1990 से इस अधिकार की मांग कर रही थीं। ज्यूडिशियरी और एजुकेशन की फील्ड में दखल देने वाले कुछ अतिवादी मौलवी इसके खिलाफ थे, उनका कहना था कि इससे समाज भ्रष्ट होगा और पाप का जन्म होगा।
कमेटी देगी फैसले पर सुझाव

– हालांकि फैसले को लागू करने में थोड़ा वक्त लगेगा क्योंकि किंग ने अपने आदेश में इसे सही तरीके से लागू करने के लिए एक कमेटी बनाने के लिए कहा है। यह कमेटी 30 दिन में अपने सुझाव देगी और उसके बाद अगले साल जून तक आदेश को लागू किया जाएगा।
शरिया कानून का भी ध्यान रखा जाएगा

– किंग का आदेश उन लोगों की भी जीत है जो सालों से महिलाओं को यह अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करते आ रहे थे। वैसे किंग ने महिलाओं को लाइसेंस जारी करने की इजाजत तो दी है, लेकिन इसमें भी शरिया कानून का ध्यान रखने की बात भी कही गई है।
फैसला इकोनॉमिक रिफॉर्म्स का हिस्सा: खालिद

– अमेरिका में सऊदी अरब के राजदूत प्रिंस खालिद बिन सलमान बिन अब्दुल अजीज ने कहा कि महिलाओं को कार चलाने की इजाजत देने का एलान इकोनॉमिक रिफॉर्म्स का हिस्सा है। खालिद बिन सलमान ने मीडिया से कहा, ”इस घोषणा के बाद महिलाओं को कार चलाने की इजाजत होगी। यह फैसला सिर्फ एक अहम सोशल चेंज नहीं बल्कि सऊदी के इकोनॉमिक रिफॉर्म्स का हिस्सा है।

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