वाहन नहीं मिला, मोटर साइकल पर रखकर ले गए बच्ची का शव

सागर। बीएमसी-जिला अस्पताल मर्जिंग के बाद बुधवार को मार्मिक और दुखद मामला सामने आया। पांच साल की बच्ची की मौत के बाद शव वाहन उपलब्ध न होने के कारण मजबूर पिता और चाचा मोटर साइकिल पर बच्ची का शव रखकर सागर मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर बंडा के चीलपहाड़ी गांव ले गए।

जिला अस्पताल परिसर में बुध्ावार दोपहर करीब 12 बजे बंडा के चीलपहाड़ी गांव निवासी हल्ले अहिरवार अपनी मासूम बेटी रानी का शव रखकर बैठे हुए थे। शव वाहन मिलने की जब उम्मीद नहीं दिखी तो हल्ले ने कंबल में लिपटे बेटी के शव को मोटरसाइकिल पर बैठकर गोद में रखा और घर ले गए। बाइक को हल्ले का छोटा भाई चला रहा था। सागर से 35 किलोमीटर दूर अपने गांव वे दुखी हृदय और व्यथित मन से बाइक पर ही बच्ची के शव को घर तक लेकर गए।

हल्ले अहिरवार के अनुसार, बेटी रानी को मंगलवार शाम से उल्टियां हो रही थीं। जब उल्टियां नहीं रुकीं और बच्ची की हालत गंभीर होने लगी तो परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर आए और भर्ती कराया। गंभीर हालत के चलते इलाज के दौरान सुबह बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची के शव को घर ले जाने के लिए डॉक्टर से शव वाहन दिलाने की मांग की गई थी, लेकिन शव वाहन नहीं मिल सका।

मेरे पास कोई आया ही नहीं

बंडा के चीलपहाड़ी गांव बच्ची का शव ले जाने और शव वाहन मांगे जाने की जानकारी मेरे पास नहीं आई। मैं तो दोपहर तक ऑफिस में ही बैठा था। कोई भी व्यक्ति मेरे पास नहीं आया। यदि आता तो वाहन अवश्य ही मिल जाता। जबकि सुबह ही गिरवर के पास रगौली गांव के लिए एक शव वाहन भिजवाया था। ऐसे मामलों में असंवेदनशीलता या लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता। मीडिया से ही इस तरह की जानकारी मिली है।

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