PM मोदी के मन की बात : भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गंदगी, गरीबी भारत छोड़ो

PM मोदी ने बताया क्यों मनाया जाता है अगस्त क्रांति दिवस

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 34वीं संस्करण में देशवासियों से साझा किए अपने विचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात में कहा कि यह नई पीढ़ी को जानना चाहिए कि हम 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस क्यों मनाते हैं और 1942 में इस दिन हुआ क्या था। PM मोदी ने कहा कि यह जानना भी जरूरी है कि भारत छोड़ो का नारा किसने दिया था।

मोदी ने कहा कि अब हमको गंदगी, भ्रष्टाचार,जातिवाद,आतंकवाद को भारत छोड़ो का नारे को आत्मसात करने का वक्त है।

‘मन की बात’ के 34वीं संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से साझा किए अपने विचारों का यह मूल पाठ प्रस्तुत है।

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार,

मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिए बड़ा लुभावना काल होता है । पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति – हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं । लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है । प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएँ, उसका भीषण स्वरुप, बहुत विनाश कर देता है । बदलते हुए मौसम चक्र और पर्यावरण में जो बदलाव आ रहा है उसका बड़ा ही negative impact भी हो रहा है।
पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, North-East, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से को अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है ।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पूरी monitoring हो रही है । व्यापक स्तर पर राहत कार्य किये जा रहे हैं । जहाँ हो सके वहां, मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं । राज्य सरकारें भी अपने–अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं ।

सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं । भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, NDRF के लोग हों, para military forces हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं ।

बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है । फसलों, पशुधन, infrastructure, roads, electricity, communication links सब कुछ प्रभावित हो जाता है । खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फसलों को, खेतों को, जो नुकसान होता है, तो इन दिनों तो हमने insurance कंपनियों को और विशेष करके crop insurance कंपनियों को भी proactive होने के लिए योजना बनाई है ताकि किसानों के claim settlement तुरंत हो सकें । और बाढ़ की परिस्थिति को निपटने के लिए 24×7 control room help line number 1078 लगातार काम कर रहा है । लोग अपनी कठिनाइयाँ बताते भी हैं ।
वर्षा ऋतु के पूर्व अधिकतम स्थानों पर mock drill करके पूरे सरकारी तंत्र को तैयार किया गया । NDRF की टीमें लगाई गयीं । स्थान-स्थान पर आपदा मित्र बनाना और आपदा मित्र के Do’s & Don’ts की training करना, volunteers तय करना, एक जन-संगठन खड़ा कर करके ऐसी परिस्थिति में काम करना । इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, अब technology इतनी आगे बढ़ी है, space science का भी बहुत बड़ा रोल रहा है उसके कारण, क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं । धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं ।

जब भी मैं ‘मन की बात’ के लिए तैयारी करता हूँ तो मैं देख रहा हूँ मुझसे ज्यादा देश के नागरिक तैयारी करते हैं । इस बार तो GST को लेकर के इतनी चिट्ठियाँ आई हैं, इतने सारे phone call आए हैं और अभी भी लोग GST के संबंध में खुशी भी व्यक्त करते हैं, जिज्ञासा भी व्यक्त करते हैं । एक phone call मैं आपको भी सुनाता हूँ

“नमस्कार प्रधानमंत्री जी, मैं गुडगाँव से नीतू गर्ग बोल रही हूँ । मैंने आपके Chartered Accountancy की speech सुनी और बहुत प्रभावित हुई । इसी तरह हमारे देश में पिछले महीने आज ही की तारीख़ पर Goods and Services Tax GST की शुरुआत हुई । क्या आप बता सकते हैं कि जैसा सरकार ने expect किया था, वैसे ही result एक महीने बाद आ रहे हैं या नहीं! मैं इसके बारे में आपके विचार सुनना चाहूँगी, धन्यवाद ।

GST के लागू हुए क़रीब एक महीना हुआ है और उसके फ़ायदे दिखने लगे हैं । और मुझे बहुत संतोष होता है, खुशी होती है जब कोई ग़रीब मुझे चिट्ठी लिखकर के कहता है कि GST के कारण एक ग़रीब की ज़रुरत की चीजों में कैसे दाम कम हुए हैं, चीजें कैसे सस्ती हुई हैं । अगर north-east, दूर-सुदूर, पहाड़ों में, जंगलों में रहने वाला कोई व्यक्ति चिट्ठी लिखता है कि शुरू में डर लगता था कि पता नहीं क्या है! लेकिन अब जब मैं उसमें सीखने समझने लगा तो मुझे लगता है, पहले से ज्यादा आसान हो गया काम । व्यापार और आसान हो गया । और सबसे बड़ी बात है, ग्राहकों का व्यापारी के प्रति भरोसा बढ़ने लगा है । अभी मैं देख रहा था कि transport and logistic sector पर कैसे GST का impact पड़ा । कैसे अब ट्रकों की आवाजाही बढ़ी है । दूरी तय करने में समय कैसे कम हो रहा है । highways clutter free हुए हैं । ट्रकों की गति बढ़ने के कारण pollution भी कम हुआ है । सामान भी बहुत जल्दी से पहुँच रहा है । ये सुविधा तो है ही लेकिन साथ-साथ आर्थिक गति को भी इससे बल मिलता है । पहले अलग-अलग tax structure होने के कारण transport and logistics sector का अधिकतम resources paperwork maintain करने में लगता था और उसको हर state के अन्दर अपने नये-नये warehouse बनाने पड़ते थे ।

GST जिसे मैं Good and Simple Tax कहता हूँ, सचमुच उसने हमारी अर्थव्यवस्था पर एक बहुत ही सकारात्मक प्रभाव और बहुत ही कम समय में उत्पन्न किया है । जिस तेजी से smooth transaction हुआ है, जिस तेजी से migration हुआ है, नये registration हुए हैं । इसने पूरे देश में एक नया विश्वास पैदा किया है । और कभी-न-कभी अर्थव्यवस्था के पंडित, management के पंडित, technology के पंडित, भारत के GST के प्रयोग को विश्व के सामने एक model के रूप में research करके जरूर लिखेंगे । दुनिया की कई यूनिवर्सिटियों के लिए एक case study बनेगा । क्योंकि इतने बड़े scale पर इतना बड़ा change और इतने करोड़ों लोगों के involvement के साथ इतने बड़े विशाल देश में उसको लागू करना और सफलतापूर्वक आगे बढ़ना, ये अपने आप में सफलता की एक बहुत बड़ी ऊँचाई है ।

विश्व ज़रूर इस पर अध्ययन करेगा और GST लागू किया है, सभी राज्यों की उसमें भागीदारी है, सभी राज्यों की ज़िम्मेवारी भी है । सारे निर्णय राज्यों ने और केंद्र ने मिलकर के सर्वसम्मति से किये हैं । और उसी का परिणाम है कि हर सरकार की एक ही प्राथमिकता रही कि GST के कारण ग़रीब की थाली पर कोई बोझ न पड़े । और GST App पर आप भलीभाँति जान सकते हैं कि GST के पहले जिस चीज का जितना दाम था, तो नई परिस्थिति में कितना दाम होगा वो सारा आपके mobile phone पर available है ।

One Nation – One Tax कितना बड़ा सपना पूरा हुआ । GST के मसले को मैंने देखा है कि जिस प्रकार से तहसील से ले कर के भारत सरकार तक बैठे हुए सरकार के अधिकारियों ने जो परिश्रम किया है, जिस समर्पण भाव से काम किया है । एक प्रकार से जो friendly environment बना सरकार और व्यापारियों के बीच, सरकार और ग्राहकों के बीच, उसने विश्वास को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है । मैं इस कार्य से लगे हुए सभी मंत्रालयों को, सभी विभागों को, केंद्र और राज्य सरकार के सभी मुलाजिमों को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ । GST भारत की सामूहिक शक्ति की सफलता का एक उत्तम उदाहरण है । यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है । और ये सिर्फ tax reform नहीं है, एक नई ईमानदारी के संस्कृति को बल प्रदान करने वाली अर्थव्यवस्था है । एक प्रकार से एक सामाजिक सुधार का भी अभियान है । मैं फिर एक बार सरलतापूर्वक इतने बड़े प्रयास को सफल बनाने के लिए कोटि-कोटि देशवासियों को कोटि-कोटि वंदन करता हूँ ।

मेरे प्यारे देशवासियों, अगस्त महीना क्रांति का महीना होता है । सहज रूप से ये बात हम बचपन से सुनते आए हैं और उसका कारण है, 1 अगस्त, 1920 – ‘असहयोग आन्दोलन’ प्रारंभ हुआ । 9 अगस्त, 1942 – ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रारंभ हुआ जिसे ‘अगस्त क्रांति’ के रूप में जाना जाता है और 15 अगस्त, 1947 – देश आज़ाद हुआ । एक प्रकार से अगस्त महीने में अनेक घटनाएँ आज़ादी की तारीख़ के साथ विशेष रूप से जुड़ी हुई हैं । इस वर्ष हम, ‘भारत छोड़ो’ ‘Quit India Movement’ इस आन्दोलन की 75वीं वर्षगाँठ मनाने जा रहे हैं । लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि ‘भारत छोड़ो’ – ये नारा डॉ. यूसुफ़ महर अली ने दिया था । हमारे नई पीढ़ी को जानना चाहिए कि 9 अगस्त, 1942 को क्या हुआ था ।
1857 से 1942 तक जो आज़ादी की ललक के साथ देशवासी जुड़ते रहे, जूझते रहे, झेलते रहे, इतिहास के पन्ने भव्य भारत के निर्माण के लिए हमारी प्रेरणा है । हमारे आज़ादी के वीरों ने त्याग, तपस्या, बलिदान दिए हैं, उससे बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है । ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का एक महत्वपूर्ण संघर्ष था । इसी आन्दोलन ने ब्रिटिश-राज से मुक्ति के लिए पूरे देश को संकल्पित कर दिया था । ये वो समय था जब अंग्रेजी सत्ता के विरोध में भारतीय जनमानस हिंदुस्तान के हर कोने में, गाँव हो, शहर हो, पढ़े हो, अनपढ़ हो, ग़रीब हो, अमीर हो, हर कोई कंधे-से-कंधा मिला करके ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ का हिस्सा बन गया था । जन-आक्रोश अपनी चरम सीमा पर था । महात्मा गाँधी के आह्वान पर लाखों भारतवासी ‘करो या मरो’ के मंत्र के साथ अपने जीवन को संघर्ष में झोंक रहे थे । देश के लाखों नौजवानों ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी, किताबें छोड़ दी थी । आज़ादी का बिगुल बजा वो चल पड़े थे । 9 अगस्त, ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ महात्मा गाँधी ने आह्वान तो किया, लेकिन सारे बड़े नेता अंग्रेज सल्तनत ने जेल में हर किसी को डाल दिया और वो कालखंड था कि देश में second generation की leadership ने डॉ. लोहिया, जयप्रकाश नारायण जैसे महापुरुषों ने अग्रिम भूमिका निभाई थी।

‘अहसयोग आन्दोलन’ और ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ 1920 और 1942 महात्मा गाँधी के दो अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं । ‘अहसयोग आन्दोलन’ के रूप-रंग अलग थे और forty two की वो स्थिति आई, तीव्रता इतनी बढ़ गई कि महात्मा गाँधी जैसे महापुरुष ने ‘करो या मरो’ का मंत्र दे दिया । इस सारी सफलता के पीछे जन-समर्थन था, जन-सामर्थ्य था, जन-संकल्प था, जन-संघर्ष था । पूरा देश एक होकर के लड़ रहा था । और मैं कभी-कभी सोचता हूँ अगर इतिहास के पन्नों को थोड़ा जोड़ करके देखें, तो भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हुआ । 1857 से प्रारंभ हुआ स्वतंत्रता संग्राम 1942 तक हर पल देश के किसी न किसी कोने में चलता रहा । इस लम्बे कालखंड ने देशवासियों के दिल में आज़ादी की ललक पैदा कर दी । हर कोई कुछ-न-कुछ करने के लिए प्रतिबद्ध हो गया । पीढ़ियाँ बदलती गई लेकिन संकल्प में कोई कमी नहीं आई । लोग आते गए, जुड़ते गए, जाते गए, नये आते गए, नये जुड़ते गए और अंग्रेज सल्तनत को उखाड़ करके फेंकने के लिए देश हर पल प्रयास करता रहा । 1857 से 1942 तक की इस परिश्रम ने, इस आन्दोलन ने एक ऐसी स्थिति पैदा की, कि 1942 इसकी चरम सीमा पर पहुँचा और ‘भारत छोड़ो’ का ऐसा बिगुल बजा कि 5 वर्ष के भीतर-भीतर 1947 में अंग्रेजों को जाना पड़ा । 1857 से 1942 – आज़ादी की वो ललक जन-जन तक पहुँची । और 1942 से 1947 – पाँच साल, एक ऐसा जन-मन बन गया संकल्प से सिद्धि के पाँच निर्णायक वर्ष के रूप में सफलता के साथ देश को आज़ादी देने का कारण बन गए । ये पाँच वर्ष निर्णायक वर्ष थे ।
अब मैं आपको इस गणित के साथ जोड़ना चाहता हूँ I 1947 में हम आज़ाद हुए I आज 2017 है I करीब 70 साल हो गये I सरकारें आईं-गईं I व्यवस्थायें बनी, बदली, पनपी, बढ़ी I देश को समस्याओं से मुक्त कराने के लिए हर किसी ने अपने-अपने तरीके से प्रयास किये I देश में रोजगारी बढ़ाने के लिए, गरीबी हटाने के लिए, विकास करने के लिए प्रयास हुए I अपने-अपने तरीके से परिश्रम भी हुआ I सफलताएँ भी मिलीं I अपेक्षाएँ भी जगीं I जैसे 1942 to 1947 संकल्प से सिद्धि के एक निर्णायक पांच वर्ष थे I मैं देख रहा हूँ कि 2017 से 2022 संकल्प से सिद्धि के और एक पांच साल का तबका हमारे सामने आया है I इस 2017 के 15 अगस्त को हम संकल्प पर्व के रूप में मनाएँ और 2022 आज़ादी के जब 75 साल होंगे, तब हम उस संकल्प को सिद्धि में परिणित करके ही रहेंगे I अगर सवा-सौ करोड़ देशवासी 9 अगस्त क्रांति दिवस को याद करके इस 15 अगस्त को हर भारतवासी संकल्प करें, व्यक्ति के रूप में, नागरिक के रूप में – मैं देश के लिए इतना करके रहूँगा, परिवार के रूप में ये करूँगा, समाज के रूप में ये करूँगा, गाँव और शहर के रूप में ये करूँगा, सरकारी विभाग के रूप में ये करूँगा, सरकार के नाते ये करूँगा I करोड़ों-करोड़ों संकल्प हों । करोड़ों-करोड़ों संकल्प को परिपूर्ण करने के प्रयास हों I तो जैसे 1942 to 1947 पाँच साल देश को आज़ादी के लिए निर्णायक बन गए I ये पांच साल 2017 से 2022 के भारत के भविष्य के लिए भी निर्णायक बन सकते हैं और बनाने हैं I पांच साल बाद देश की आजादी के 75 साल मनायेंगे I तब हम सब लोगों को दृढ़ संकल्प लेना है आज I 2017 हमारा संकल्प का वर्ष बनाना है I यही अगस्त मास संकल्प के साथ हमें जुड़ना है और हमें संकल्प करना है I गंदगी – भारत छोड़ो, ग़रीबी – भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार – भारत छोड़ो, आतंकवाद – भारत छोड़ो, जातिवाद – भारत छोड़ो, सम्प्रदायवाद – भारत छोड़ो I आज आवश्यकता करेंगे या मरेंगे की नहीं, बल्कि नये भारत के संकल्प के साथ जुड़ने की है, जुटने की है, जी-जान से सफलता पाने के लिए पुरूषार्थ करने की है । संकल्प को लेकर के जीना है I जूझना है I आइये इस अगस्त महीने में 9 अगस्त से संकल्प से सिद्धि का एक महाभियान चलायें I प्रत्येक भारतवासी, सामाजिक संस्थाएँ, स्थानीय निकाय की इकाइयाँ, स्कूल, कॉलेज, अलग-अलग संगठन हर एक New India के लिए कुछ न कुछ संकल्प लें I एक ऐसा संकल्प जिसे अगले 5 वर्षों में हम सिद्ध कर के दिखाएँगे I युवा संगठन, छात्र संगठन, NGO, आदि सामूहिक चर्चा का आयोजन कर सकते हैं I नये-नये idea उजागर कर सकते हैं I एक राष्ट्र के रूप में हमें कहाँ पहुंचना है? एक व्यक्ति के नाते उसमें मेरा क्या योगदान हो सकता है? आइये इस संकल्प के पर्व पर हम जुड़ें I मैं आज विशेष रूप से Online World क्योंकि हम कहीं हों या न हों लेकिन online तो ज़रुर होते हैं I जो online वाली दुनिया है और खासकर के मेरे युवा साथियों को, मेरे युवा मित्रों को, आमंत्रित करता हूँ कि नये भारत के निर्माण में वे innovative तरीके से योगदान के लिए आगे आएँ I Technology का उपयोग करते video, post, blog , आलेख, नए-नए idea वो सभी बातें लेकर कर के आएँ I इस मुहिम को एक जन आंदोलन में परिवर्तित करें I NarendraModiApp पर भी युवा मित्रों के लिए Tweet India Quiz launch किया जाएगा I यह quiz युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से परिचित कराने का एक प्रयास है I मैं मान रहा हूँ कि आप जरुर इसका व्यापक प्रचार करें, प्रसार करें I

मेरे प्यारे देशवासियों, 15 अगस्त, देश के प्रधान सेवक के रूप में मुझे लाल किले से देश के साथ संवाद करने का अवसर मिलता है I मैं तो एक निमित्त मात्र हूँ I वहाँ वो एक व्यक्ति नहीं बोलता है I लाल किले से सवा-सौ करोड़ देशवासियों की आवाज गूँजती है I उनके सपनों को शब्दबद्ध करने की कोशिश होती है और मुझे खुशी है कि पिछले 3 साल से लगातार 15 अगस्त निमित्त देश के हर कोने से मुझे सुझाव मिलते हैं कि मुझे 15 अगस्त पर क्या कहना चाहिए? किन मुद्दों को लेना चाहिए? इस बार भी मैं आपको निमंत्रित करता हूँ I MyGov पर या तो NarendraModiApp पर आप अपने विचार मुझे जरुर भेजिये I मैं स्वयं ही उसे पढ़ता हूँ और 15 अगस्त को जितना भी समय मेरे पास है, उसमें इसको प्रकट करने का प्रयास करूँगा I पिछले 3 बार के मुझे मेरे 15 अगस्त के भाषणों में एक शिकायत लगातार सुनने को मिली है कि मेरा भाषण थोड़ा लम्बा हो जाता है I इस बार मैंने मन में कल्पना तो की है कि मैं इसे छोटा करूँ I ज्यादा से ज्यादा 40-45-50 मिनट में पूरा करूँ I मैंने, मेरे लिए नियम बनाने की कोशिश की है पता नहीं मैं कर पाऊँगा कि नहीं कर पाऊँगा I लेकिन मैं इस बार कोशिश करने का इरादा रखता हूँ कि मैं मेरा भाषण छोटा कैसे करूँ? देखते हैं सफलता मिलती है कि नहीं मिलती है I

मैं देशवासियों, एक और भी बात आज करना चाहता हूँ । भारत की अर्थव्यवस्था में एक सामाजिक अर्थशास्त्र है । और उसको हमने कभी भी कम नही आँकना चाहिए । हमारे त्योहार, हमारे उत्सव, वो सिर्फ़ आनंद-प्रमोद के ही अवसर हैं, ऐसा नहीं है । हमारे उत्सव, हमारे त्योहार एक सामाजिक सुधार का भी अभियान है । लेकिन उसके साथ-साथ हमारे हर त्योहार, ग़रीब से ग़रीब की आर्थिक ज़िन्दगी के साथ सीधा सम्बन्ध रखते हैं । कुछ ही दिन के बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी उसके बाद गणेश उत्सव, उसके बाद चौठ चन्द्र, फिर अनंत चतुर्दशी, दुर्गा पूजा, दिवाली एक-के-बाद, एक-के-बाद-एक और यही समय है जब ग़रीब के लिए, आर्थिक उपार्जन के लिए अवसर मिलता है । और इस त्योहारों में एक सहज स्वाभाविक आनंद भी जुड़ जाता है । त्योहार, रिश्तों में मिठास, परिवार में स्नेह, समाज में भाईचारा लाते हैं । व्यक्ति और समाज को जोड़ते हैं । व्यक्ति से समष्टि तक की एक सहज यात्रा चलती है । अहम् से वयम की ओर जाने का एक अवसर बन जाती है । जहाँ तक अर्थव्यवस्था का सवाल है राखी के कई महीनों पहले से सैकड़ों परिवारों में छोटे-छोटे घरेलू उद्योगों में राखियाँ बनाना शुरू हो जाती हैं । खादी से लेकर के रेशम के धागों की न जाने कितनी तरह की राखियाँ और आजकल तो लोग home made राखियों को ज्यादा पसंद करते हैं । राखियाँ बनाने वाले, राखियाँ बेचने वाले, मिठाई वाले हज़ारों सैकड़ों का व्यवसाय एक त्योहार के साथ जुड़ जाता है । हमारे अपने ग़रीब, भाई-बहन, परिवार इसी से तो चलते हैं । हम दीपावली में दीप जलाते हैं, सिर्फ़ वो प्रकाश पर्व ऐसा ही नहीं है, वो सिर्फ़ त्योहार है घर का सुशोभन है ऐसा नहीं है, उसका सीधा-सीधा सम्बन्ध छोटे-छोटे मिट्टी के दीये बनाने वाले उन ग़रीब परिवारों से है । लेकिन जब आज मैं त्योहारों और त्योहार के साथ जुड़े ग़रीब के अर्थव्यवस्था की बात करता हूँ, तो साथ-साथ मैं पर्यावरण की भी बात करना चाहता हूँ ।

मैंने देखा है कि कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि मुझसे भी देशवासी ज्यादा जागरूक हैं, ज्यादा सक्रिय हैं । पिछले एक महीने से लगातार पर्यावरण के प्रति सज़ग नागरिकों ने मुझे चिट्ठियाँ लिखी हैं । और उन्होंने आग्रह किया है कि आप गणेश चतुर्थी में eco-friendly गणेश की बात समय से पहले बताइये ताकि लोग मिट्टी के गणेश की पसंद पर अभी से योजना बनाएँ । मैं सबसे पहले तो ऐसे जागरूक नागरिकों का आभारी हूँ । उन्होंने मुझे आग्रह किया है कि मैं समय से पहले इस विषय पर कहूँ । इस बार सार्वजनिक गणेश उत्सव का एक विशेष महत्व है । लोकमान्य तिलक जी ने इस महान परम्परा को प्रारंभ किया था । ये वर्ष सार्वजनिक गणेश-उत्सव का 125वाँ वर्ष है । सवा-सौ वर्ष और सवा-सौ करोड़ देशवासी लोकमान्य तिलक जी ने जिस मूल भावना से समाज की एकता और समाज की जागरूकता के लिए, सामूहिकता के संस्कार के लिए, सार्वजनिक गणेश-उत्सव प्रारंभ किया था । हम फिर से एक बार गणेश-उत्सव के इस वर्ष में निबंध स्पर्द्धाएँ करें, चर्चा सभाएँ करें, लोकमान्य तिलक के योगदान को याद करें । और फिर से तिलक जी की जो भावना थी, उस दिशा में हम सार्वजनिक गणेश-उत्सव को कैसे ले जाएँ । उस भावना को हम फिर से कैसे प्रबल बनायें और साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के लिए eco-friendly गणेश, मिट्टी से बने हुए ही गणेश, ये हमारा संकल्प रहे और इस बार तो मैंने बहुत जल्दी कहा है । मुझे जरुर विश्वास है कि आप सब मेरे साथ जुड़ेंगे और इस से लाभ ये होगा कि हमारे जो ग़रीब कारीगर हैं, ग़रीब जो कलाकार हैं, जो मूर्तियाँ बनाते हैं उनको रोज़गार मिलेगा, ग़रीब का पेट भरेगा । आइये हम हमारे उत्सवों को ग़रीब के साथ जोड़ें, ग़रीब की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ें, हमारे त्योहार का आनंद, ग़रीब के घर का आर्थिक त्योहार बन जाए, आर्थिक आनंद बन जाए – ये हम सब का प्रयास रहना चाहिये । मैं सभी देशवासियों को आने वाले अनेक विविध त्योहारों के लिए, उत्सवों के लिए, बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ ।

मेरे प्यारे देशवासियों, हम लोग लगातार देख रहे हैं कि शिक्षा का क्षेत्र हो, आर्थिक क्षेत्र हो, सामाजिक क्षेत्र हो, खेल-कूद हो – हमारी बेटियाँ देश का नाम रोशन कर रही हैं । नई-नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रही हैं । हम देशवासियों को हमारी बेटियों पर गर्व हो रहा है, नाज़ हो रहा है । अभी पिछले दिनों हमारी बेटियों ने महिला क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया । मुझे इसी सप्ताह उन सभी खिलाड़ी बेटियों से मिलने का मौका मिला, उनसे बातें करके मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मैं अनुभव कर रहा था कि world cup जीत नहीं पाई, इसका उन पर बड़ा बोझ था । उनके चहरे पर भी उसका दबाव था, तनाव था उन बेटियों को मैंने कहा और मैंने मेरा एक अलग मूल्यांकन दिया । मैंने कहा – देखिये आजकल media का ज़माना ऐसा है कि अपेक्षायें इतनी बढ़ा दी जाती हैं, इतनी बढ़ा दी जाती हैं और जब सफ़लता नहीं मिलती है तो वो आक्रोश में परिवर्तित भी हो जाती है । हमने कई ऐसे खेल देखे हैं कि भारत के खिलाड़ी अगर विफ़ल हो गए तो देश का गुस्सा उन खिलाड़ियों पर टूट पड़ता है । कुछ लोग तो मर्यादा तोड़ करके कुछ ऐसी बातें बोल देते हैं, ऐसी चीज़े लिख देते हैं, बड़ी पीड़ा होती है । लेकिन पहली बार हुआ कि जब हमारी बेटियाँ विश्व कप में सफ़ल नहीं हो पायीं तो सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने उस पराजय को अपने कंधे पर ले लिया । ज़रा-सा भी बोझ उन बेटियों पर नहीं पड़ने दिया, इतना ही नहीं इन बेटियों ने जो किया, उसका गुणगान किया, उनका गौरव किया । मैं इसे एक सुखद बदलाव देखता हूँ और मैंने इन बेटियों को कहा कि आप देखिये ऐसा सौभाग्य सिर्फ़ आप ही लोगों को मिला है आप मन में से निकाल दीजिये कि आप सफ़ल नहीं हुए हैं । मैच जीते या न जीते, आप ने सवा-सौ करोड़ देशवासियों को जीत लिया है । सचमुच में हमारे देश की युवा-पीढ़ी ख़ासकर के हमारी बेटियाँ सचमुच में देश का नाम रोशन करने के लिए बहुत कुछ कर रही हैं । मैं फिर से एक बार देश की युवा-पीढ़ी को विशेषकर के हमारी बेटियों को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ । शुभकामनायें देता हूँ ।

मेरे प्यारे देशवासियों, फिर एक बार स्मरण करवाता हूँ । अगस्त क्रान्ति को फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ । 9 अगस्त को फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ । 15 अगस्त को फिर एक बार स्मरण करा रहा हूँ । 2022 आज़ादी के 75 साल, हर देशवासी संकल्प करे, हर देशवासी संकल्प को सिद्ध करने का 5 साल का road map तैयार करे । हम सबको देश को नयी ऊँचाइयों पर पहुँचाना है, पहुँचाना है और पहुँचाना है । आओ, हम मिल करके चलें, कुछ-न-कुछ करते चलें । देश का भाग्य, भविष्य उत्तम हो के रहेगा, इस विश्वास के साथ आगे बढ़ें । बहुत-बहुत शुभकामनायें । धन्यवाद ।

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