PM मोदी से चर्चा के बाद एर्दोगान ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ तुर्की रहेगा साथ

भारत और तुर्की ने साल 2020 तक आपसी व्यापार को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जो अभी करीब छह अरब डॉलर है।

नई दिल्ली । तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान द्वारा जम्मू-कश्मीर मसले के समाधान के लिए “बहुपक्षीय संवाद” के सुझाव के बाद सोमवार (एक मई) को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष आतंकवाद को रोकने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय पर्यास करने पर सहमत हैं।

एर्दोगान या मोदी के अभिभाषण में कश्मीर का जिक्र नहीं किया गया लेकिन भारत ने कश्मीर पर लक्ष्मण रेखा खींचते हुए ये साफ कर दिया कि उसके लिए ये भारत और पाकिस्तान के बीच “द्विपक्षीय” मसला है और भारत इसे “सीमा पार आतंकवाद” एवं “राज्य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद” के तौर पर देखता है जिसे घाटी में पाकिस्तान बढ़ावा दे रहा है।

क्या एर्दोगान ने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था? इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, “इस पर हमारा रुख एकदम साफ है। उनके सामने इसका उल्लेख किया गया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

आतंकवाद पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्हें बताया गया कि भारत सीमापार आतंकवाद और राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार है। हम पाकिस्तान से न केवल कश्मीर बल्कि आतंकवाद और दूसरे अहम मसलों पर “द्विपक्षीय” बातचीत करने के लिए तैयार है। हम कश्मीर पर शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के अनुरूप कश्मीर पर द्विपक्षीय बातचीत के लिए तैयार हैं।”

इस पर तुर्की के राष्ट्रपति की क्या प्रतिक्रिया थी ये पूछने पर बागले ने कहा, “उन्हें बहुत ध्यान से हमारी बात सुनी।” भारतीय प्रधानमंत्री से दो घंटे तक चली बातचीत के बाद एर्दोगान ने 24 अप्रैल को सुकमा में भारतीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ पर हुए माओवादी हमले और “आतंकवाद” की आलोचना की। एर्दोगान ने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में तुर्की हमेशा भारत के साथ रहेगा। हालांकि उन्होंने कश्मीर या जम्मू-कश्मीर में हमले का कोई जिक्र नहीं किया।

दोनों देशों ने आपसी आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी बात की। दोनों नेताओं ने साल 2020 तक आपसी व्यापार को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अभी दोनों देशों के बीच छह अरब डॉलर का कारोबार होता है।

सोमवार को दोनों देशों की तरफ से जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, “दोनों नेताओं ने फिर से जोर देकर आतंकवाद के सभी रूपों और प्रसार की सख्त आलोचना की। किसी के भी द्वारा कहीं भी आतंकवाद को बढ़ावा देने को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। दोनों देश सभी देशों और संस्थाओं से अपील करते हैं कि वो आतंकवादियों के जाल को काटने और उनकी वित्तीय मदद रुकवाने के साथ ही सीमापार आतंकवाद पर लगाम लगाएं।”

संयुक्त बयान में ये भी कहा गया कि “दोनों नेता आतंकवाद और आतंकवाद निरोधक कार्रवाइयों पर दोहरे मापदंड अपनाने की भी कड़ी आलोचना करते हैं।” हालांकि परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) में शामिल होने के लिए तुर्की द्वारा भारत और पाकिस्तान दोनों का समर्थन करने पर भी दोनों नेताओं ने कुछ नहीं कहा। तुर्की उन चंद देशों में है जो एनएसजी का सदस्य बनाए जाने को लेकर भारत और पाकिस्तान को एक तराजू पर तौलता है। पीएम मोदी ने एमटीसीआर में भारत की सदस्यता और “एनएसजी में भारत के आवेदन” के समर्थन के लिए तुर्की का आभार जताया।

एर्दोगान ने भारत में मौजूद कथित “गुलेनवादियों” का मुद्दा उठाया। एर्दोगान ने कहा, “मुझे पता है कि भारत एफईटीओ को अपनी सीमा से हमेशा के लिए हटाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।” तुर्की पिछले साल जुलाई से ये मुद्दा उठा रहा है। भारतीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई की पहल नहीं की गई है। एफईटीओ के मसले पर बागले ने कहा, “जहां तक एफईटीओ का संबंध है….भारत में मौजूद किसी भी भारतीय या विदेशी संगठन को हमारे नियम-कानून के अनुसार काम करना होता है।”

RO-11436/55

11359/79

11363/40

Recommended For You

About the Author: india vani