मप्र कृषि प्रधान है और नोटबंदी से एग्रीकल्चर पर कोई असर नहीं पड़ा…योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा

उज्जैन. नोटबंदी और फिर जीएसटी लागू होने से प्रदेश पर किसी प्रकार का असर होने से योजना आयोग उपाध्यक्ष चैतन्य कुमार कश्यप ने इनकार किया है। उनके अनुसार मप्र कृषि प्रधान है और नोटबंदी से एग्रीकल्चर पर कोई असर नहीं पड़ा है, नहीं प्रदेश के बजट के प्रावधानों में कोई कमी आई है। प्रदेश में २१ प्रतिशत की ग्रोथ रेट मैंटेन है।

कश्यप ने सोमवार को जिला कार्ययोजना की संभागीय बैठक ली। इसके बाद मीडिया से चर्चा में नोटबंदी व जीएसटी के असर को लेकर उन्होंने कहा, दो-तीन महीनों के आंकड़ों से हम ऐसा नहीं कह सकते हैं कि इनसे प्रदेश में कोई असर पड़ा है। वास्तविक रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रदेश में पेट्रोल पर टैक्स में कमी को नोटबंदी या जीएसटी के असर की क्षतिपूर्ति मानने के सवाल पर कश्यप ने बताया, केंद्र के आह्वान पर यह युक्तियुक्तकरण किया गया है। समर्थन मूल्य पर प्याज खरीदी को उन्होंने तत्कालिक महत्वपूर्ण निर्णय बताया। इसी कारण भावांतर योजना लागू की है ताकि ऐसी कोई परिस्थिति न बने।

प्रदेश के लिए उत्पादन बढ़ाना चुनौती है
कृषि उत्पादन बढ़ाना प्रदेश के लिए चुनौती है। उपाध्यक्ष कश्यप के अनुसार हमारी एग्रो इकॉनोमी है। हमने सिंचाई के साधन दिए हैं, ग्रोथ रेट भी २१ प्रतिशत तक पहुंची है, लेकिन अब बड़ा सवाल है कि उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, कैसे गांवों तक नई तकनीक पहुंचाई जाए। इसी लिए विकेंद्रीकरण योजना के माध्यम से जिस जगह जो खेती होती है, उसे बढ़ावा देने का प्रयास है।

जिलों के लिए राशि बढ़ाने का प्रयास
प्रदेश के बजट में अभी जिलों के लिए औसत करीब ३० प्रतिशत हिस्सा रहता है। कश्यप के अनुसार इसे बढ़ाकर ४० प्रतिशत तक करने का प्रयास है ताकि जिलों की आवश्यकतानुसर विकास कार्य हो सकें। इसके लिए जनप्रतिनधियों से भी क्षेत्रीय आवश्यकताओं के प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से आयोग तक पहुंचाने का कहा है। उन्होंने बताया सरकार आउट पुट-आउटकम का विश्लेषण करेगी। मसलन यदि कहीं स्कूल भवन का निर्माण हुआ है तो उक्त खर्च से निर्माण होना आउट पुट होगा। स्कूल बनने से कितने विद्यार्थी लाभान्वित हुए, शिक्षा क्षेत्र में क्या लाभ मिले, आदि आउटकम होगा।

प्रदेश में सीएसआर सिर्फ २० प्रतिशत
मप्र में सीएसआर (कार्पोरेट सोश्यल रिस्पोंसब्लिटी) की महज करीब २० फीसदी राशि ही प्राप्त हो रही है। उपाध्यक्ष के अनुसार सीएसआर से लगभग एस हजार करोड़ रुपए के कार्य होना चाहिए, जबकि अभी भागीदारी औसत २०० करोड़ रुपए तक ही है। इसे बढ़ावा देने के लिए कॉपोरेट हाउस को सेमिनार किया था। प्रथम चरण में टाटा फाउंडेशन से एग्रीमेंट हुआ है। टाटा के विशेषज्ञ पांच हजार गांव में बदलाव करने के लिए कार्य करेंगे। शुरुआत में ५०० गांव चिह्नित किए हैं।

चार जिलों में ६४७ करोड़ की कार्ययोजना मंजूर
योजना आयोग उपाध्यक्ष चैतन्य कुमार कश्यप ने मेला कार्यालय में संभाग के उज्जैन, देवास, शाजापुर व आगर-मालवा जिले की जिला कार्य योजना 2018-19 की बैठक ली। इस दौरान उक्त जिलों के लिए विभिन्न विभागों की ६४७ करोड़ रुपए से अधिक की कार्य योजनाओं को मंजूरी व बजट में प्रावधान किया गया। सर्वाधिक स्वीकृति उज्जैन जिले के लिए २६६ करोड़ रुपए की दी गई। उपाध्यक्ष कश्यप ने कहा, हमारी योजना का मुख्य उद्देश्य विलेज ट्रांसफार्मेशन है। हम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को पूर्ण रूप से साकार करना चाहते हैं। आज भी हमारे गांव मूलभूत सुविधाओं में कहीं न कहीं पिछड़े हुए हैं और सुविधाएं अन्तिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रही हैं। विकेन्द्रीकृत जिला योजना के माध्यम से हम इन्हें अन्तिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाएंगे। उन्होंने बताया, अभी भी प्रदेश के 18 हजार गांव विद्युतीकरण से वंचित हैं। अभी भी बहुत से ऐसे मजरे, टोले और मकान हैं, जहां बिजली नहीं है। जिला योजना के अन्तर्गत इन सभी गांव, मजरे व टोलों में बिजली आपूर्ति की जाएगी। अधिकारियों के बाद कश्यप ने जनप्रतिनधियों के साथ भी बैठक की और उनके सुझाव लिए। बैठक में आयोग के मुख्य आर्थिक सलाहकार राजेन्द्र मिश्रा सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर व अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

जबरिया बिजली बिल वसूली न करें
जनप्रतिनिधियों ने बैठक में किसानों ने जबरन बिजली बिल वसूलने पर आपत्ति ली। उनका कहना था कि किसानों को धमकाकर या सामग्री जब्त कर वसूली की जा रही है। कश्यप ने इस संबंध में आयोग की ओर से मंत्रालय को पत्र लिखने का आश्वासन दिया। सूत्रों के अनुसार देवास के एक जनप्रतिनिध ने विभागों की आपसी तालमेल नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया, सामंजस्य की कमी के कारण सड़क निर्माण में पोल शिफ्टिंग के लिए एक करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च करना पड़ी है। जनप्रतिनिधियों ने बलराम तालाब की राशि बढ़ाने, खेत सड़कों की मरम्मत, छोट-छोटे स्टापडेम की संख्या में वृद्धि, शीतगृहों को विद्युत बिलों पर सब्सिडी आदि का सुझाव दिया। कश्यप ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे लघु योजनाओं को प्रभावी ढंग से बनवाकर अमल करवाएं।

उज्जैन में फूलों की खेती का प्रस्ताव मंजूर
बैठक में कृषि विभाग की योजना प्रारूप के प्रस्तुतिकरण के दौरान बताया गया कि जिले में किसानों को कम पानी की फसलें लेने व फसल चक्र परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विशेष रूप से गंभीर डैम के 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को गेहूं के स्थान पर चना लगाने के लिए सुझाव दिया जा रहा है। इसके लिए प्रस्तुत आवश्यक योजना प्रस्ताव को बैठक में स्वीकृत कर दिया गया। साथ ही जिले में फूलों की खेती के लिए भी 15 लाख रुपए का प्रस्ताव रखा गया जिसे स्वीकृत किया गया।

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