मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सामाजिक सुधार से रोकेगा तीन तलाक

भोपाल। शरीयत में बदलाव मंजूर नहीं है। बुराई हर समाज में है। तीन तलाक के मामले समाज में अज्ञानता के कारण सामने आ रहे हैं। इन्हें शरीयत में बदलाव कर या कोई कानून बनाकर नहीं रोका जा सकता है। इस पर रोक के लिए सोशल रिफार्म की जरूरत है। लोगों को सही तरीका मालूम हो इसकी दरकार है। चंद लोगों के विरोध के कारण लाखों लोगों की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती है।

यह राय मुस्लिम महिलाओं की है, जो उन्होंने सोमवार को इकबाल मैदान पर आयोजित हुए जलसा ए ख्वातीन में जताई। जलसे में करीब पांच हजार महिलाएं न सिर्फ शामिल हुईं, बल्कि पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी बात भी रखी। देशभर के उलेमाओं ने जहां पर्दे में रहकर जलसे को संबोधित किया, वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की अध्यक्ष असमा जहरा ने तीन तलाक पर बोर्ड के फैसले से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है लेकिन तीन तलाक के मसले पर कोर्ट का फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक नहीं है। हिन्दुस्तान में सभी मजहबों में जिंदगी गुजारने के जो बुनियादी हक हासिल है, वो हक भी कोर्ट के इस फैसले से प्रभावित हो रहा है। लिहाजा इस मसले पर देश भर में जगरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाया जाएगा कि एक बार में तीन तलाक उचित नहीं है। साथ ही शरीयत में हासिल महिलाओं के अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

इसके अलावा बोर्ड ने महिलाओं से जुड़े इस मसले पर देश भर में जलसे करने का भी निर्णय लिया है। इन जलसों में महिलाओं से संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे। इसकी शुरूआत आज यहां भोपाल के जलसे से हुई। जहां महिलाओं ने संकल्प पत्र भरकर कहा कि शरीयत में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है। बोर्ड यह संकल्प पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, महिला व विधि आयोग को भेजेगा।

जलसे में बोर्ड के राबे हसन नदवी, शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी ने खिताब करते हुए मुस्लिम महिलाओं को शरीयत क्या कहती है यह समझाया। उन्होंने कहा कि शरीयत के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। मुस्लिम महिलाएं शरीयत पर कायम रहेंगी। निकाह इस्लामी तरीके से होना चाहिए। वहीं पांच कायदे पूरे किए बिना तलाक भी नहीं दिया जा सकता। जलसे में बोर्ड के महासचिव वली रहमानी को महिलाओं ने संकल्प पत्र सौंपे।

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