नोटबंदी हो गई, बैंकों के पास पैसा आ गया, फिर भी ‘सबसे अधिक जोखिम में हैं भारतीय बैंक’

नई दिल्ली: रेटिंग एजेंसी मूडीज के एक अध्ययन के अनुसार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय बैंक सबसे अधिक जोखिम वाले बैंकों में हैं. पीएम मोदी द्वारा नवंबर माह में हुई नोटबंदी के बाद भारतीय बैंकों के पास अपार धन आया बावजूद इसके मूडीज द्वारा भारतीय बैंकों को सबसे अधिक जोखिम वाला बताना हैरतअंगेज है. दरअसल मूडीज ने कहा है कि पूंजी की कमी के चलते उनमें पर्याप्त कर्ज प्रावधान की कमी है.

एजेंसी ने अपने एक अध्ययन में यह कहा है. इस अध्ययन के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी बाजारों तक उनकी सीमित क्षमता के बावजूद सरकार इन संस्थानों में पूंजी निवेश बढ़ाने को लेकर अनिच्छुक नजर आती है.

मूडीज के इस सर्वेक्षण के अनुसार, ‘दक्षिण तथा दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय बैंक सबसे अधिक जोखिम में हैं. हम मानते हैं कि भारत में अनेक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और वे ​ऋण नुकसान मद में पर्याप्त प्रावधान नहीं कर पा रहे.’ इस सप्ताह की शुरुआत में मूडीज ने कई भारतीय बैंकों को लेकर अपना दृष्टिकोण संशोधित किया है. इसे सकारात्मक से नकारात्मक या फिर स्थिर किया गया है.

इसी माह मूडीज ने कहा था कि माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को लागू करना भारत की रेटिंग के लिये सकारात्मक कदम है. इससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गति और तेज होगी और कर राजस्व में वृद्धि होगी. मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने यह बात कही. मूडीज के उपाध्यक्ष (सावरेन जोखिम समूह) विलियम फोस्टर ने कहा, ‘जीएसटी से मध्यम अवधि में कारोबार सुगमता बढ़ने, राष्ट्रीय बाजार का एकीकरण होने और विदेशी निवेश स्थल के तौर पर भारत का आकर्षण बढ़ने से हमारा मानना है कि उत्पादकता बढ़ेगी और जीडीपी वृद्धि की गति और तेज होगी.’ जीएसटी से कर प्रशासन और अनुपालन में सुधार होने से सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा.

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