उत्तराखंड बस हादसा : पापा! दादी न जाने कहां चली गईं..:

बेटमा, इंदौर। उत्तरकाशी में हुए बस हादसे की सूचना बेटमा में मंगलवार शाम सत्यनारायण सासोदिया के मोबाइल पर आए कॉल से मिली, जो बचाव दल के कर्मचारी ने लगाया था। उसने फोन पर ही सत्यनारायण को उनकी घायल बेटी भावना से बात कराई। बेटी ने अपने पिता से यह कहा पापा ! ये लोग मुझे मोटे-मोटे इंजेक्शन लगा रहे हैं। हाथ से खून बह रहा है। दादी न जाने कहा चली गई।

मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा रहा है। सिर्फ बल्लू (भावना की बुआ का लड़का) ही सामने खड़ा है। बस नदी में गिर गई थी। कुछ समझ नहीं आया। ये कैसे हो गया। चारों तरफ पानी ही पानी था। मुझे कुछ लोगों ने नदी से बाहर निकाला। बहुत दर्द हो रहा है पापा। आप आ जाओ….। यह कहते हुए भावना रोने लगी।

दादी की मदद के लिए गई थी : बेटमा में रहने वाली भावना की दादी धार्मिक यात्रा पर जा रही थी। भावना उन्हें छोड़ने के लिए उज्जैन तक गई थी, लेकिन दिल नहीं माना और दादी की चिंता सताने लगी। इसके बाद वह भी साथ हो ली।

बस का एक हिस्सा भागीरथी नदी में समाया

डीएम के अनुसार घायलों को रेस्क्यू कर जिला अस्पताल उत्तरकाशी लाया गया है। बस का एक हिस्सा भागीरथी में समाया हुआ है। घायल युवती भावना साधु दिया ने बताया कि बस में चालक और हेल्पर समेत 30 लोग सवार थे। उसने परिजन को फोन पर बताया कि वह अस्पताल में है और कोई जल्दी पहुंचकर उसे बचा ले।

चार किमी दूर जाना पड़ा रेस्क्यू टीम को

घायलों को निकालने के लिए बचाव दल को 4 किमी की दूरी तय करनी पड़ी। खाई में उतरने के लिए टीम धरासू बैंड और वहां से दो किमी आगे मरगांव तक गई। इसके बाद गंगा नदी के दूसरे किनारे पहुंच रस्सियों के सहारे घायलों को बाहर निकाला गया। इस दौरान मरगांव और चमियारी के ग्रामीणों ने यात्रियों को निकालने में मदद की।

10 माह में 26 जानें गईं

नालूपानी में दस माह में चार हादसे हो चुके हैं। इनमें 26 जानें जा चुकी हैं। नालूपानी के पास 16 फरवरी 2017 को एक कार दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इसमें दो इंजीनियरों की मौत हुई थी। मंगलवार को जो यात्री बस दुर्घटना हुई, वह भी ठीक उसी स्थान पर हुई, जहां से इंजीनियरों की कार खाई में गिरी थी।

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