9 माह से गायब थी नाबालिग जब मिली तो पुलिस ने सीधे घर भेज दिया

इंदौर। एक तरफ सरकार नाबालिग बच्चों का शोषण होने पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंस एक्ट (पॉक्सो) कानून का सख्ती से पालन कर दोषियों को सजा देने की बात कहती है, वहीं सरकार के ही नुमाइंदे कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नौ माह तक 15 पंद्रह साल की नाबालिग लड़की घर से गायब थी और जब दो दिन पहले पुलिस को मिली तो उसे घर रवाना कर दिया, जबकि बाल कल्याण समिति ने उसे संस्था में रखने के आदेश दिए थे। अब समिति इस मामले की बाल आयोग को शिकायत करने जा रही है।

घटना शुक्रवार शाम अन्नपूर्णा पुलिस थाना क्षेत्र की है। यहां रहने वाली 15 साल की लड़की 19 साल के युवक के साथ भाग गई थी। परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराई। शुक्रवार को लड़की युवक के साथ मिल गई। पहले तो पुलिस नियमानुसार नाबालिग लड़की को महिला सशक्तीकरण के दफ्तर लेकर पहुंची। इंदौर में फिलहाल बाल कल्याण समिति नहीं होने से उज्जैन की समिति के पास शासन ने सभी अधिकार दे रखे हैं। उज्जैन की समिति ने फोन पर नाबालिग को श्रद्धानंद आश्रम में रखने व शनिवार को मेडिकल कराने के आदेश दिए। पुलिस ने इस आदेश को दरकिनार कर लड़की को घर रवाना कर दिया, जबकि पॉक्सो एक्ट में इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत सुरक्षित स्थान पर आश्रय देने की गाइड लाइन है।

रात में मौखिक आदेश मान्य होते हैं, पर पुलिस ने नहीं माना

मामले में जिला बाल संरक्षण अधिकारी अविनाश यादव ने कहा कि जब पुलिस को अपनी मर्जी से ही लड़की को सौंपना था तो वे उसे सशक्तीकरण कार्यालय लेकर ही क्यों आए? किशोर न्याय अधिनियम में स्पष्ट गाइड लाइन है कि रात में समिति के मौखिक आदेश को मान्य किया जाएगा, जबकि पुलिस हमसे लिखित आदेश मांग रही थी। शनिवार को बाल कल्याण समिति ने हमसे उस लड़की के बारे में जानकारी मांगी तो हमारे पास कोई जवाब नहीं था। हमने लिखित में दे दिया कि पुलिस ने समिति के आदेश को नहीं माना और नाबालिग को परिवार को सौंप दिया।

युवक पर धारा 376 में केस दर्ज

लड़की ने माता-पिता के साथ जाने की इच्छा जाहिर की थी। परिवार भी चाहता था कि लड़की उनके साथ रहे, इसलिए उसे भेज दिया। शनिवार को उसका मेडिकल परीक्षण कराया है। युवक पर धारा 376 के तहत केस दर्ज किया है।

– बीएल मंडलोई, टीआई, अन्नपूर्णा थाना

पुलिस की लापरवाही है

यह गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में पुलिस की ड्यूटी है कि वह बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए बिना नाबालिग को परिवार को न सौंपे। इस मामले में भी बच्ची को संस्था में रखने के आदेश दिए गए थे, जिसकी अवहेलना की गई। संबंधित थाने से मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

– मोहन खंडेलवाल, सदस्य, बाल कल्याण समिति, उज्जैन

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