हाफिज सईद की नजरबंदी नहीं होगी खत्म, पंजाब सरकार ने लाहौर हाइकोर्ट को सूचना दी

लाहौर : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की नजरबंदी समाप्त करने के उसके अनुरोध को खारिज कर दिया है. पंजाब के गृह विभाग ने मंगलवार को लाहौर उच्च न्यायालय को यह सूचना दी. इसके साथ ही गृह विभाग ने कहा कि कानून व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर सईद के अनुरोध को खारिज कर दिया गया. गृह विभाग ने अपने फैसले के बारे में अदालत को दो पृष्ठों का जवाब सौंपा.

विभाग ने उसके संगठनों जेयूडी और फलाह-ए-इंसानियत की विभिन्न अवैध गतिविधयों का जिक्र करते हुए कहा कि हाफिज सईद के कृत्यों से कानून प्रवर्तक और खुफिया एजेंसियों की आशंकाओं की पुष्टि होती है कि अगर उसे रिहा किया जाता है तो उसकी गतिविधियों से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. व्यापक जनहित को देखते हुए सईद को नजरबंदी में रखने की सिफारिश की गयी है. न्यायमूर्ति मजाहिर अली नकवी ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक स्थगित कर दी.

उल्लेखनीय है कि मुंबई आतंकी हमले के सूत्रधार सईद और उसके चार सहयोगियों ने अपनी नजरबंदी की अवधि और बढ़ाये जाने के फैसले को चुनौती दी थी. दरअसल, जमात-उद-दावा ने अदालत में याचिका दी थी कि हाफिज सईद को कई महीनों से अवैध तरीके से हिरासत में रखा जा रहा है. इस पर पाकिस्तान सरकार ने कोर्ट में कहा कि हाफिज सईद के खिलाफ अशांति फैलाने के पर्याप्त सबूत हैं और उस पर आतंकवादी निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की गयी है.

गौरतलब है कि हाफिज सईद 30 जनवरी से लाहौर में नजरबंद है. बाद में पाकिस्तान ने हाफिज सईद का नाम आतंकवाद रोधी अधिनियम (एटीए) की चौथी अनुसूची पर शामिल कर दिया है. पाकिस्तान ने यह कदम पड़ोसी भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के सालों के दबाव के बाद उठाया था. इसके साथ ही, मुंबई की 26/11 हमले में उसका हाथ होने की बात सामने आयी थी, जिसमें छह अमेरिकी नागरिक समेत 166 लोग मारे गये थे. भारत तब से पाकिस्तान से लगातार उसे सौंपने को कहता रहा है. हाफिज सईद को कश्मीरियों के बीच अलगाववादी गतिविधियों में भड़काने के लिए अमेरिका ने दुनिया में ‘आंतकवाद के लिए जिम्मेदार’ लोगों की सूची में शामिल किया गया.

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