मिस्र: जुमे के दिन मस्जिद में बम विस्फोट, लाशों में बदले 235 नमाजी

काहिरा । मिस्र के अशांत उत्तरी इलाके में स्थित सिनाई प्रांत में आतंकियों ने शुक्रवार को नमाज के दौरान एक मस्जिद पर बम हमला किया, जिसमें कम से कम 235 लोगों की मौत हो गई। इस हमले में 109 अन्य लोग घायल हो गए हैं।

नमाजियों पर गोलीबारी :
अधिकारियों ने बताया कि अलआरिश शहर से करीब 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित अल रौदा मस्जिद के समीप यह बम रखा गया था, जो नमाज के दौरान फट गया। उस समय मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए बड़ी तादाद में लोग एकत्र थे। धमाके के बाद मौके से भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर संदिग्ध आतंकियों ने गोलियां भी चलाईं। वे चार वाहनों में सवार होकर आए थे।

निशाने पर सुरक्षा बल :

मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता खालिद मुजाहिद ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार दिया। एक रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा लगता है कि आतंकवादियों के निशाने पर सुरक्षा बलों के समर्थक थे, जो इस मस्जिद में नमाज पढ़ रहे थे। हमले में मस्जिद को भी काफी नुकसान पहुंचा है। इसको देश में पिछले चार साल में चरमपंथी समूहों द्वारा किया गया सबसे भीषण हमला माना जा रहा है।

किसी ने जिम्मा नहीं लिया :

फिलहाल किसी भी आतंकी या चरमपंथी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि पूर्व में इस्लामिक स्टेट (आईएस) यहां सैकड़ों पुलिसकर्मियों, सैनिकों तथा नागरिकों को मार चुका है। वह सुन्नी समुदाय के उदारवादी सूफी मत को मानने वालों और ईसाइयों को निशाना बनाता रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अल रौदा मस्जिद में सूफी विचार को मानने वाले लोगों का आना जाना होता है। हमले में घायल लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए करीब 50 एंबुलेंस मौके पर भेजे गए। घायलों की बड़ी तादाद को देखते हुए मृतकों की तादाद बढ़ने का अंदेशा है।

तीन दिन का राष्ट्रीय शोक :

मिस्र सरकार ने इस हमले में मारे गए लोगों के लिए तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी इस घटना पर चर्चा के लिए अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर रहे हैं। अरब लीग के काहिरा स्थिति प्रमुख अहमद अब्दुल घेइत ने इस हमले को खौफनाक अपराध बताया है, जिसने फिर दिखाया है कि इस्लाम का आतंकी विचारों को मानने वालों से कोई वास्ता नहीं है।
अमेरिका ने निंदा की :

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को खौफनाक और कायराना करार दिया। ट्रंप ने ट्विटर पर कहा, दुनिया इस आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकती। हमें उनको सैन्य पराजित करना होगा और उनके वजूद को आधार देने वाली आतंकी विचारधारा को नकारना होगा।

आतंकी हमलों का सिलसिला
-2011 में जनवरी में क्रांति के दौरान राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को अपदस्थ किए जाने के बाद से सिनाई में कई हिंसक हमले हुए हैं

-2013 में मोहम्मद मुरसी को राष्ट्रपति पद से अपदस्थ किए जाने के बाद सिनाई में पुलिस और सेना को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ीं
-2014 के नवंबर में मिस्र के चरमपंथियों ने आईएस के प्रति निष्ठा जताई, तभी से देश की सेना उनके खिलाफ अभियान चला रही है
-700 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं 2013 के बाद से अब तक, जबकि सैकड़ों आतंकियों को भी सुरक्षाबलों ने मार गिराया है

इस साल के प्रमुख हमले

-26 मई को मध्य मिस्र में ईसाइयों से भरी बस पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमें 28 लोग मारे गए और 25 घायल हो गए
-09 अप्रैल को अलेक्जेंड्रिया और टांटा में चर्चों को निशाना बनाकर दो आत्मघाती हमले हुए, जिनमें 46 लोगों की मौत हो गई

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