EVM पर सर्वदलीय बैठक 12 मई को, चुनाव आयोग रखेगा अपना पक्ष

नई दिल्ली: ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से कथित छेड़छाड़ के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग ने 12 मई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सभी राजनीतिक पार्टियां शामिल होंगी जिसमें चुनाव आयोग ईवीएम को लेकर अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा. गौर हो कि चंद महीने पहले संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम सिस्टम के लेकर संदेह जताया है और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं. लेकिन चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं है. चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती.

विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से कथित छेड़छाड़ की छह और याचिकाओं पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग और इन क्षेत्रों से निर्वाचित प्रत्याशियों तथा अन्य को नोटिस जारी किए. पिछले सप्ताह ईवीएम से कथित छेडछाड़ पर एक मिलती-जुलती याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने देहरादून जिले में विकासनगर विधानसभा क्षेत्र की वोटिंग मशीनों को सील करने के आदेश दिए थे. राजकुमार, अम्बरीष कुमार, प्रभुलाल बहुगुणा, गोदावरी थापली, विक्रम सिंह नेगी और चरण सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर देहरादून जिले की राजपुर रोड, हरिद्वार जिले की भेल रानीपुर, रायपुर, मसूरी, प्रतापनगर और हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों की ईवीएम सील करने किये जाने की प्रार्थना की है.

हाल ही में 16 विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से मतदान पत्र (बैलेट पेपर) व्यवस्था की ओर लौटने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि ईवीएम में लोगों का विश्वास खत्म हो गया है. गौरतलब है कि वीवीपीएटी से एक पर्ची निकलती है जिसे देख कर मतदाता यह सत्यापित करता है कि ईवीएम में उसका वोट उसी उम्मीदवार को गया है जिसके नाम के आगे का उसने बटन दबाया है. समझा जाता है कि चुनाव आयोग एक खुली चुनौती देकर किसी से भी यह कहने वाला है कि वह ईवीएम के दुरूपयोग के संदेह को दूर करने के लिए उसे हैक करने की कोशिश कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि आयोग ने चुनाव में उपयोग के लिए वीवीपीएटी मशीनों की आपूर्ति के लिए आदेश दिया है.

इस साल पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश, उत्तारखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इसके स्थान पर मतपत्र का इस्तेमाल करने की हिमायत की थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईवीएम के दुरूपयोग का आरोप लगाने वालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं जबकि बसपा नेता मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मशीन के बारे में सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस और बसपा सहित कई पार्टियों ने इसपर सवाल उठाए थे.

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