छत्तीसगढ़: मैनपाट में होने वाली इस फसल से खुलेगी किसानों की लॉटरी !

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के किसान इन दिनों एक ऐसी फसल की खेती कर रहे हैं। इस फसल से उन्हें बेहतर लाभ मिल रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है।

इस साल मैनपाट में किसान करीब पांच हजार हैक्टेयर में टाऊ की फसल उगाई जा रही है। किसानों को टाऊ की उन्नत खेती और फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के आलू एवं फल अनुसंधान केंद्र मैनपाट ने खनिज निधि के वित्तीय सहयोग से एक करोड़ 25 लाख रुपए की लागत टाऊ प्रसंस्करण एवं विपणन इकाई की स्थापना की जा रही है। जिला प्रशासन के अफसरों ने बताया कि खनिज निधि से यह राशि स्वीकृत की गई है।

चाय, हर्बल ड्रिंक और गद्दे बनाए जाएंगे

प्रसंस्करण केंद्र में टाऊ के आटे से साथ-साथ इस पर आधारित अलग-अलग खाद्य पदार्थ जैसे चाय, हर्बल ड्रिंक और मेडिकेटेड गद्दे और तकिया का निर्माण किया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से 4 दशक पहले तिब्बती शरणार्थियों को सरगुजा के मैनपाट में बसाया गया था। मैनपाट का वातावरण और जालवायु तिब्बत की तरह होने के कारण यहा बसने वाले लोगों के लिए तिब्बत में उगाए जाने वाले टाऊ की खेती प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई थी। टाऊ की खेती को मिल रही कामियाबी की वजह से यहां के आस-पास के करीब पांच हजार हैक्टेयर जमीन पर इसकी खेती की जा रही है।

टाऊ की फसल में किसी तरह के कीटों और रोगों का कोई खतरा नहीं होता और मवेशी भी इसे किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और इसी वजह से किसानों के लिए टाऊ का उत्पादन सस्ता, सरल और लाभदायक होता है। मैनपाट में टाऊ की पैदावार आठ से दस क्विंटल प्रति हैक्टेयर के हिसाब से होती है। स्थानीय व्यापारी किसानों से 3500 से 4000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से टाऊ खरीदते हैं।

आटे का बाजार में मिलता है अच्छा दाम

टाऊ को बक व्हीट के नाम पर भी जाना जाता है, इसमें प्रोटीन, एमिनो एडिड्स, विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटी ऑक्साइडेन्ट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसका आटा बाजार में 150 से लेकर 200 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। टाऊ के आटे में ग्लुटेन नहीं पाया जाता जिसकी वजह से यह ह्दय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसे असाध्य रोगों से लड़ने में फायदेमंद होता है।

मैनपाट में टाऊ प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य नहीं मिल पा रहा था। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मैनपाट स्थित आलू एवं फल अनुसंधान (पैकजिंग एवं विपणन) केंद्र की की स्थापना का प्रस्ताव भेजा गया। जिला प्रशासन ने प्रस्ताव का अनुमोदन कर जिला खनिज निधि के मद से प्रसंस्करण संयंत्र के लिए 61 लाख रुपए स्वीकृत कर 50 फीसदी राशि 30.50 लाख रुपए जारी भी कर दिए गए। संयत्र के शेड के निर्माण के लिए 40 लाख रुपए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को जारी किए गए हैं। इसके अलावा टाऊ की खेती के लिए रिवालविंद फंड से करीब 40 लाख रुपए जिला खनिज निधि से मुहैया कराए जाएंगे।a

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