झाड़ि‍यों में मिली बच्ची को संभालने वाली महिला बोली- मैं उसे पालूंगी

‘विजय ने जब उसे मेरी गोद में दिया था, वह जोर-जोर से बिलख रही थी। उसका बदन गंदा था। मैंने गरम पानी की पट्टियों से उसका बदन पोछा और उसे दूध पिलाया। दूध पीते ही वह गोद में ही सो गई। उसके बाद विजय उसे मुझे सौंपकर चले गए। मैंने 7 दिन तक उसे अपनी बच्ची की तरह पाला। उसकी मालिश की और दूध पिलाया। मैंने तो उसका नाम विजयलक्ष्मी रख दिया है। विजय के कहने पर हमने उसे पुलिस को सौंप दिया। उसने कहा था कि उसे कानूनी तरीके से गोद लेना चाहिए, इसलिए मैं भी तैयार हो गई। उसके जाने के बाद से ही मुझे नींद नहीं आई हैं। मेरी एक बेटी है, लेकिन अब मैं विजयलक्ष्मी को भी पालना चाहती हूं। वह छोटी बच्ची है। उसे मां की जरूरत है।’

यह कहना है बागमुगालिया देशी कलारी के पास मिली बच्ची को 7 दिन तक अपने पास रखने वाली अमराई निवासी सविता (38) का। उन्होंने नवदुनिया से बात करते हुए बताया कि वे बच्ची को पाने के लिए पूरी कोशिश करेंगी। सविता के चार बच्चे हैं, उनमें सबसे बड़ी बेटी मनोरमा है। सबसे छोटा बेटा सचिन (15) आठवीं में पढ़ता है। गौरतलब है कि अवधपुरी निवासी विजय गिरी को बच्ची झाड़ियों में मिली थी।

नहीं लगा बच्ची को छोड़ने वालों का पता

विवेचना अधिकारी राजेश सिंह के मुताबिक अब तक बच्ची को झाड़ियों में फेंकने वाले का सुराग नहीं लग पाया है। आसपास की कॉलोनियों से जानकारी एकत्रित करने के साथ ही 8 तारीख की रात 8 बजे के बाद साढ़े 11 बजे तक जन्मी बच्चियों की जानकारी ली जा रही है। हालांकि, अब तक की जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिल पाया है।

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