मैडम मेरी बकरी चोरी हो गई… चार दिन से नहीं मिल रही भैंस

मैडम, आंगन में बंधी मेरी बकरी चोरी हो गई है….पड़ोसी मुझे घूरता रहता है…चार दिन से भैंस नहीं मिल रही। पति ने मेरी मर्जी के बगैर मकान बेच दिया…। राज्य महिला आयोग में आने वाली 15 फीसदी शिकायतों की यह बानगी है। महिला अधिकारों के संरक्षण और प्रताड़ना संबंधी मामलों के बजाय ऐसी शिकायतों से आयोग भी परेशान है।

राज्य महिला आयोग में हर दिन प्रदेश भर से करीब 70 शिकायतें आती हैं। इनमें करीब एक दर्जन मामले इसी तरह की शिकायतों के रहते हैं। कई मामले ऐसे भी रहते हैं जिनमें घरेलु नोंक-झोंक पर भी कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है। होशंगाबाद जिले से एक महिला ने आयोग से उसकी चोरी हुई बकरी ढूंढने में मदद मांगी है। जबलपुर जिले के किसान ने अपनी भैंस गुमने की शिकायत भी आयोग को भेजी है।

सागर जिले में ग्रामीण महिला अपने पड़ोसी से परेशान है, वह उसे घूरता रहता है। महिला ने आयोग को चिट्ठी भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उसने आयोग अध्यक्ष को लिखा है कि उसका पड़ोसी को जेल भिजवा दें। मुरैना जिले में एक किसान ने अपना मकान पत्नी की बिना अनुमति के बेच दिया। महिला ने आपत्ति जताते हुए यह प्रकरण भी आयोग के संज्ञान में भेजा है।

जबलपुर से ही किराएदारी का विवाद भी आयोग में आया है, किराएदार ने दो महीने से मकान मालकिन को किराया नहीं दिया। आयोग से आग्रह है कि भुगतान जल्दी कराए।

महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेड़े का कहना है कि ऐसी शिकायतों के कारण आयोग का समय बर्बाद होता है। कई शिकायतें ऐसी भी रहती हैं जो आयोग के दायरे में नहीं आतीं उन्हें संबंधित विभागों को भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आयोग के सामने अभी 3 हजार मामले पैंडिंग हैं। एक साल में 8 हजार प्रकरणों का निपटारा किया गया है। इस तरह की ‘नान सीरियस’ शिकायतों से आयोग का कार्यालयीन स्टाफ भी परेशान है। उन्हें इनका लेखा-जोखा रखना पड़ता है।

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