उज्जैन, खंडवा, सीहोर, होशंगाबाद, हरदा और राजगढ़ में भारी वर्षा की चेतावनी

भोपाल। सूखे से आशंकित प्रदेश पर मानसून की अचानक मेहरबानी ने तीन दिन में सारी शिकायत दूर कर दी। किसानों के चेहरे खिल गए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र में दिनभर रुआंसे किसानों के आने वाले फोन कॉल का सिलसिला गुरुवार से बंद हो गया।

जबरदस्त बरसात से जहां पूर्वी मप्र में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है, वहीं पश्चिम मप्र में सामान्य बारिश के लिए अब महज 16 फीसदी की कसर बाकी है। वर्तमान में एक बड़ा सिस्टम मध्य और पश्चिम मप्र पर सक्रिय है।

इससे एक-दो दिन में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज हो जाने की संभावना है। उधर, मौसम विज्ञानियों ने अगले 24 घंटे के दौरान उज्जैन संभाग के साथ ही सीहोर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, होशंगाबाद, हरदा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, विदिशा, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, सागर, गुना जिले में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रदेश में अब तक सबसे कम आगर जिले मे 75 फीसद बरसात हुई है। वहीं उज्जैन में 47, श्योपुर में 44, मंदसौर में 38, देवास में 27, ग्वालियर में 25 फीसद कम बरसात हुई हैं, लेकिन इन स्थानों पर गुरुवार को दिन में बरसात का सिलसिला शुरू हो चुका है।

दरअसल, प्रदेश के मध्य-उत्तर और उससे लगे हुए पूर्वी उत्तरप्रदेश पर एक शक्तिशाली गहरा कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम एक दिन पहले प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय था। इसके असर से पूर्वी क्षेत्र में महज 24 घंटे की भारी बरसात से बाढ़ के हालात बन गए।

यह सिस्टम अब पश्चिमी मप्र की तरफ बढ़ते हुए सक्रिय हो गया है। इसके असर से पश्चिमी मप्र में भारी वर्षा का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को दिनभर में होशंगाबाद में 6, शाजापुर में 4, उज्जैन में 4, रतलाम में 3, खंडवा में 3, भोपाल में 2.5 सेमी पानी गिरा।

मौसम विज्ञानी बीके साहा ने बताया कि एक दिन पहले तक पश्चिमी मप्र के कई जिलों से किसानों के दिनभर फोन आते थे। उनका कहना था कि यदि एक-दो दिन में पानी नहीं बरसा तो उनकी फसल तबाह हो जाएगी, लेकिन गुरुवार को एक भी किसान का फोन नहीं आया। उन्होंने बताया कि अभी 3-4 दिन अलग-अलग स्थानों पर अच्छी बरसात का दौर चलता रहेगा।

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