बस्ते के बोझ से दबे बच्चे, 68% को पीठ में तकलीफ

भोपाल। चौथी क्लास में पढ़ने वाले एक बच्चे के स्कूल बैग का वजन 17 किला हो सकता है। यह सुनकर भले ही अटपटा लगे, लेकिन सच्चाई यही है। स्कूली बच्चों के बैग का वजन उनकी क्षमता से दोगुना है। इस वजह उन्हें पीठ, गर्दन, कंधे, रीढ़ की हड्डी व अन्य अन्य जगह दर्द व दूसरी तकलीफ हो रही है। 68 फीसदी स्कूली बच्चे इस तरह की किसी न किसी तकलीफ से पीड़ित हैं। यह खुलासा जीएमसी के पीएसएम विभाग में हुए एक रिसर्च में हुआ है।

शहर के चार बड़े स्कूलों में क्लास 4 से 8 के बीच 950 बच्चों का खुद का वजन और बैग का वजन निकाला गया तो चौकाने वाली जानकारी सामने आई। डॉक्टरों के मुताबिक छात्र के वजन का करीब 10 फीसदी स्कूल बैग का वजन होना चाहिए, लेकिन स्टडी में बैग का औसत वजन छात्रों के वजन का करीब 18 फीसदी निकला है। सिर्फ 10 फीसदी छात्रों के बैग का वजन उनके वजन से 10 फीसदी या कम मिला है। पीएसएम विभाग की पीजी स्टूडेंट डॉ. अमरीन खान ने हाल ही में दिल्ली में इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन यूथ एंड एडोलसेंट हेल्थ में स्टडी के बारे में, जिसे काफी सराहा गया। विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पद्मा भाटिया व डॉ.मंजू दुबे ने यह स्टडी की।

कैसे हुई स्टडी

स्टडी पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच राजधानी के चार बड़े निजी स्कूलों में की गई। बैग और बिना बैग के छात्रों का वजन किया गया। नारडिक पेन स्केल के जरिए उनसे पूछा गया कि पिछले 10 दिन से लेकर सालभर पहले तक उन्हें कोई दर्द तो नहीं था।

22 फीसदी को लेना पड़ी डॉक्टरों की सलाह

जिन बच्चों ने पीठ, कंधे में दर्द या फिर अन्य तरह की तकलीफ की शिकायत की उनमें से डॉक्टर के पास दिखाने के लिए सिर्फ 22 फीसदी बच्चे ही पहुंचे। यानी बाकी 78 फीसदी ने या तो इसे गंभीरता से नहीं लिया या फिर यह सोचकर दिखाने नहीं गए कि ठीक हो जाएगा।

इसलिए हो रही ज्यादा दिक्कत

– 5 फीसदी छात्रों का बैग एक स्ट्रेप को होने के कारण कंधे पर ज्यादा वजन पड़ता है।

– 5 फीसदी छात्र सिर्फ एक स्ट्रेप से बैग टांगते, जिससे तकलीफ बढ़ती है।

यह भी निकले नतीजे

3 फीसदी बच्चों ने बाएं कंधे व 2 फीसदी ने दाहिने कंधे व लगभग इतने ने ही गर्दन में बहुत ज्यादा दर्द की शिकायत की। बैग के वजन से 46 फीसदी बच्चे आगे की ओर झुककर चलते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी में तकलीफ हो सकती है। वजन एक पोजीशन में 20 मिनट से ज्यादा देर तक नहीं रखना चाहिए, लेकिन 41 फीसदी छात्र ऐसा करते हैं।

इस स्टडी का मकसद यह पता करना था कि क्या वाकई में छात्रों के बैग का वजन उनकी क्षमता से ज्यादा है। यदि हां, इससे उन्हें क्या-क्या दिक्कतें हो रही हैं। इन दिक्कतों का कम कैसे किया जा सकता है।

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