जन्म-मृत्यु व जाति प्रमाण-पत्र होंगे ऑनलाइन : सूचना आयुक्त

भोपाल। जन्म-मृत्यु, जाति अथवा निवास प्रमाण पत्र सार्वजनिक दस्तावेज है। यह किसी परिवार अथवा व्यक्ति की निजी जानकारी नहीं, अत: इसे ऑनलाइन किया जाना चाहिए। ऐसा होने से फर्जी प्रमाण-पत्र बनने की कार्रवाई पर भी रोक लग सकेगी। राज्य सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने अलग-अलग प्रकरणों में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

इस संबंध में अपीलार्थी द्वारा जानकारी मांगने पर लोक सूचना अधिकारी ने यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि जन्म-मृत्यु से संबंधित जानकारी संबंधित परिवार की सहमति के बिना नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयुक्त ने प्रकरण का निराकरण करते हुए 15 दिन के भीतर अपीलार्थी को मांगी गई जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि उक्त फैसले के बारे में मुख्य सचिव को भी अवगत कराएं ताकि सभी विभागों को निर्देशित किया जा सके।

तुरंत हो सकेगा सत्यापन

आयुक्त त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता के लिए शासकीय योजना का लाभ लेने वाले नागरिकों के जाति, आयु, निवास एवं विकलांगता संबंधी प्रमाण पत्र की जानकारी संबंधित विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। ऐसा न होने से बार-बार सूचना के अधिकार के तहत मांगी जाती है। शासकीय विभागों को भी नौकरी देते समय इसके सत्यापन में दिक्कत होती है। इस वजह से उनका अतिरिक्त समय, धन एवं श्रम का व्यय होता है।

विभागों को दिए निर्देश

सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 19(8)(क)(4) के अंतर्गत प्रमुख सचिव अजा-जजा, पिछड़ा वर्ग कल्याण, सामाजिक न्याय विभाग को भी अपनी वेबसाइट पर जानकारी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आदेश के बारे में मुख्य सचिव मप्र शासन को भी अवगत कराने को कहा गया। राज्य सूचना आयोग के सामने इस संबंध में जुन्नाारदेव के विनोद कुमार शर्मा एवं बालाघाट के राजकुमार टेकाम की ओर अपील की गई थी।

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