एस्सार स्टील, भूषण स्टील और इलेक्ट्रोस्टील्स के लोन डिफॉल्ट के मामलों पर लेंडर्स ने SBI को दिया अधिकार

मुंबई देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई को एस्सार स्टील, भूषण स्टील और इलेक्ट्रोस्टील्स लोन डिफॉल्ट मामले को बैंकरप्सी कोर्ट में ले जाने की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद इनमें से कुछ कंपनियों के मर्जर की संभावना बढ़ी है। माना जा रहा है कि टर्नअराउंड के लिए यह काम किया जा सकता है। मुंबई में इन कंपनियों को कर्ज देने वाले बैंकों की मीटिंग हुई। इससे पता चल रहा है कि स्टील सेक्टर में लाखों करोड़ के बैड लोन से डील करने के लिए कितना जोर लगाया जा रहा है। इन तीनों कंपनियों पर बैंकों का करीब 1 लाख करोड़ रुपये बकाया है।

अगले हफ्ते की शुरुआत तक एसबीआई बैंकरप्सी कानून के तहत नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल के पास आवेदन दाखिल करेगा। एस्सार स्टील पर 44000 करोड़, भूषण स्टील पर 47000 करोड़ और इलेक्ट्रोस्टील्स पर 10200 करोड़ रुपये का कर्ज है। एसबीआई को इन तीनों कंपनियों के मामले में फैसला लेने का अधिकार मिलने से बैंकों के बीच की आपसी लड़ाई भी खत्म हो गई है। एनसीएलटी में आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद बैंकों और कंपनियों के प्रमोटर्स के पास समस्या को सुलझाने के लिए 270 दिनों का समय होगा।

बैड लोन की प्रॉब्लम से निपटने के लिए इस मामले में दो कंपनियों के मर्जर या डेट रिस्ट्रक्चरिंग की सूरत बन सकती है। दो कंपनियों के मिलने से एक बड़ी कंपनी वजूद में आएगी और फिर उसमें और पूंजी लगाई जाएगी। तब बैंक आसान शर्तों पर इस कंपनी को नया कर्ज दे सकते हैं। अगर कन्सॉलिडेशन यानी मर्जर पर सहमति बनती है तो उसकी शर्तों के बारे में बैंकरप्सी प्रॉसेस से बाहर फैसला होगा।

कुल बैंकिंग लोन का 9 पर्सेंट बैड लोन है। रिजर्व बैंक ने हाल ही में बैंकों को 12 मेगा डिफॉल्टर्स को बैंकरप्सी कोर्ट में ले जाने को कहा था। बैंक ज्योति स्ट्रक्चर्स, लैंको इन्फ्राटेक जैसी कंपनियों के मामले में एनसीएलटी में आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरे बड़े लोन एकाउंट में एमटेक ऑटो, इंफ्राटेक, भूषण पावर, जेपी इंफ्राटेक और मॉनेट इस्पात शामिल हैं। एक बैंक ने नाम जाहिर किए बिना बताया, ‘इसके अलावा, एक बड़ी कन्सल्टिंग कंपनी ने इनसॉल्वेंसी प्रफेशनल के तौर पर चुने जाने के लिए प्रेजेंटेशन दिया है।’ रेटिंग कंपनियां भी स्टील कंपनियों को लेकर इस पहल से खुश हैं। इकरा में कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स के ग्रुप हेड जयंतो रॉय ने कहा, ‘हमें लगता है कि स्ट्रेस्ड अकाउंट्स के मामलों के बैंकरप्सी कोर्ट में जाने से स्टील सेक्टर में कन्सॉलिडेशन होगा।

इसमें मजबूत स्टील कंपनियों के पास दिवालिया हो चुकीं कंपनियों की संपत्ति कम कीमत में खरीदकर मार्केट शेयर बढ़ाने का मौका मिलेगा।’ उन्होंने कहा कि ऐसी हालत में स्टील सेक्टर को लॉन्ग टर्म में फायदा होगा।

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