भावांतर योजना पर बोले कृषि मंत्री-व्यापारियों ने बना लिया है कॉकस

भोपाल। मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना को लेकर मचे बवाल के बीच सोमवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट के बाद मंत्रियों की अनौपचारिक चर्चा में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने योजना में सुधार की बात उठाई। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने कॉकस बना लिया है। वे योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं। पंजीकृत किसानों को कम भाव दिया जा रहा है।

वित्त मंत्री जयंत मलैया और ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने योजना का समर्थन करते हुए कहा कि हमने कदम उठा लिया है, कड़ाई से इसका पालन कराया जाना चाहिए। उधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे किसानों से बात करके समस्या का पता लगाएं।

साथ ही अधिकारियों से कहा कि वे परीक्षण करें कि उड़द खरीदी की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखा जाए या फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाए।

जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बैठक के बाद भावांतर भुगतान योजना पर मुख्यमंत्री ने सबसे फीडबैक लिया है। उन्होंने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभार के जिलों में किसानों से बात कर समस्या का पता लगाएं। ऐसी कठिनाइयां जो दूर की जा सकती हैं, उसके लिए कदम उठाए जाएंगे। व्यापारियों से भी चर्चा कर 50 हजार रुपए नकद भुगतान की व्यवस्था को सुचारू बनाने में सहयोग प्राप्त करें।

सूत्रों के मुताबिक चर्चा के दौरान कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने खरीदी को लेकर आ रही परेशानियों के मद्देनजर कहा कि व्यापारियों ने समूह बना लिया है और वे किसानों के हितों पर कुठाराघात कर रहे हैं। इसमें संशोधन होना चाहिए, ताकि किसानों को फायदा मिल सके। बिसेन की बातों का दो-तीन मंत्रियों ने समर्थन भी किया। इसी दौरान वित्त मंत्री जयंत मलैया और ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने कहा कि योजना हम ला चुके हैं। इसका कड़ाई से पालन होना चाहिए और जो कमियां हैं, उन्हें दूर करने के प्रयास होने चाहिए।

इसी दौरान मुख्यमंत्री ने उड़द खरीदी की मौजूदा व्यवस्था की जगह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी व्यवस्था को लागू करने परीक्षण करने के निर्देश दिए। उधर, मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश का रोडमैप तय करने के लिए गठित समूहों के प्रस्तुतिकरण के दौरान कृषि आय दोगुनी करने का ब्योरा भी रखा गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य देना जरूरी है।

उड़द के साथ ही समस्या ज्यादा

सूत्रों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना में शामिल आठ फसलों में सबसे ज्यादा भाव की समस्या उड़द के साथ ही आ रही है। दरअसल, प्रदेश में इस बार उड़द का रकबा दस लाख से बढ़ाकर 16 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसकी वजह से उत्पादन भी बढ़ा है।

इसकी खपत कम होने और गुणवत्ता प्रभावित होने की वजह से ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य 5 हजार 400 रुपए प्रति क्विंटल की जगह दो से ढाई हजार रुपए प्रति क्विंटल में ही खरीदी कर रहे हैं। पूरे सीजन में उड़द का सबसे ऊंचा भाव 3 हजार 800 रुपए क्विंटल रहा है। अभी तक 9 हजार 600 किसानों से 8 हजार 200 टन उड़द खरीदी जा चुकी है।

व्यापारी महासंघ के साथ बैठक आज

नकद भुगतान सहित अन्य समस्याओं को लेकर व्यापारी महासंघ मंगलवार को मंत्रालय में प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा के साथ बैठक करेगा। बैठक मंत्रालय में होगी। इसमें नकद भुगतान को लेकर उन्हें आने वाली समस्या और आयकर व भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मद्देनजर बात होगी।

RO-11436/55

11359/79

11363/40

Recommended For You

About the Author: india vani