आरुषि मर्डर केस: ‘सीबीआई ने सबूतों से की छेड़छाड़, गवाह तैयार किए

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरुषि मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी करते हुए सीबीआई के सभी दावों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। आरुषि और हेमराज के बीच सेक्स संबंध से लेकर राजेश और नूपुर तलवार द्वारा कत्ल की ‘कहानी’ को खारिज करते हुए कोर्ट ने यहां तक कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई, गवाह तैयार किए गए साथ ही एजेंसी ने वारदात की रात तलवार के कंपाउंडर कृष्णा की फ्लैट में मौजूदगी के ‘स्पष्ट सबूत’ को दरकिनार कर दिया। कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत पर भी नराजगी जाहिर की।

जस्टिस बी.के. नारायण और ए.के. मिश्रा की बेंच ने 273 पेजों के फैसलों में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज श्याम लाल पर भी नाराजगी दिखाई, जिन्होंने तलवार दंपति को दोषी करार दिया था। बेंच ने कहा कि उन्होंने कई सारे तथ्यों को खुद ही मानकर फैसला दे दिया जो थे ही नहीं। ट्रायल जज एक गणित के टीचर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। ट्रायल जज ने एल 32 में जो हुआ उसे एक फिल्म निर्देशक की तरह सोच लिया।

जजों ने कहा कि सीबीआई क्राइम का मोटिव भी साबित नहीं कर सकी क्योंकि आरुषि और हेमराज के बीच शारीरिक संबंध की थिअरी का कोर्ट में भंडाफोड़ हो गया। बेंच ने उन परिस्थितियों का हवाला दिया जो इस ‘अस्थिर निष्कर्ष’ की ओर नहीं ले जाता कि नूपुर और राजेश तलवार ने ही इस वारदात को अंजाम दिया होगा। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि तलवार के नोएडा फ्लैट में किसी बाहरी की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

फैसले में कहा गया, ‘निश्चित तौर पर दो नजरिए संभव हैं। एक अपीलकर्ता के दोष की ओर इशारा करता है और दूसरा उनकी बेगुनाही की ओर और हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दूसरे नजरिए को अपनाने का प्रस्ताव करते हैं जो कि अपीलकर्ता के पक्ष में है।’

हाई कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि किस तरह सीबीआई के मुख्य जांचकर्ता ए.जी.एल कौल ने हेमराज के खून वाले कृष्णा के तकिए को लेकर हैदराबाद फरेंसिक लैब की रिपोर्ट के महत्व को यह कहकर खत्म कर दिया कि कृष्णा का संबंध टाइपो एरर है।

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