भारतीय बॉलिंग अटैक की कायापलट कर सकते हैं जहीर खान, ये हैं पांच वजह

बीसीसीआई ने मंगलवार रात टीम इंडिया के मुख्य कोच का एेलान कर दिया। रवि शास्त्री को 2019 विश्व कप तक यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। विदेशी दौरों के लिए बैटिंग कंस्लटेंट राहुल द्रविड़ को बनाया गया है जबकि बॉलिंग की कमान जहीर खान को सौंपी गई है। 2003-2013 तक भारतीय टीम की गेंदबाजी की जान रहे जहीर खान का प्रदर्शन कैसा रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। 2011 के विश्वकप में उनकी धारधार गेंदबाजी के बूते भारत को जीत हासिल हुई थी। आइए आपको बताते हैं वो 5 कारण जो जहीर खान को बनाते हैं औरों से अलग:
शानदार अनुभव: इस तेज गेंदबाज ने तीन वर्ल्ड कप खेले हैं, जिसमें से 2 बार टीम फाइनल में पहुंची है। 2003 और 2011 में जहीर खान का प्रदर्शन यकीनन काबिलेतारीफ था। 2003 विश्व कप में उन्होंने 11 मैचों में 18 विकेट लिए थे, जो दिग्गज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ से भी ज्यादा थे। जबकि 2011 वर्ल्ड कप में जहीर खान ने 9 मैचों में 21 विकेट लिए थे, जो सबसे ज्यादा थे। वर्ल्ड कप में वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में से हैं। उन्होंने 23 मैचों में 44 विकेट झटके हैं।
वर्क एथिक्स: जहीर खान एक नैचुरल प्रतिभाशाली गेंदबाज नहीं थे। उन्होंने टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय शरीर तेज गेंदबाजी के लिए नहीं बने हैं, लेकिन भारत से बाहर गेंदबाजी करने से बहुत अलग भी नहीं है। उन्होंने कहा था कि आपको खुद को समझने के लिए काफी ज्यादा समय देना पड़ता है। 2003 विश्व कप के बाद उनकी फॉर्म गिर गई और उन्हें सी ग्रेड कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत की। 2006 में वह इंग्लैंड गए और अपनी गेंदबाजी पर ध्यान दिया।

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