अनिल कुंबले को दोबारा कोच देखना नहीं चाहते टीम इंडिया के 10 खिलाड़ी, बोले-बॉसगिरी दिखाते हैं

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच अनिल कुंबले का कार्यकाल चैम्पियंस ट्रॉफी के बाद खत्म हो जाएगा। वीरेंद्र सहवाग, टॉम मूडी और अन्य क्रिकेटर्स ने इस पद के लिए आवेदन किया है। वहीं कुंबले भी इस रेस में दोबारा उतरे हैं। लेकिन उनके बारे में कुछ हैरान करने वाली बातें सामने आई है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि मौजूदा टीम इंडिया के 10 खिलाड़ी नहीं चाहते कि बीसीसीआई अनिल कुंबले को दोबारा कोच बनाए। केवल एक खिलाड़ी उनके समर्थन में है।

डीएनए इंडिया ने बोर्ड अॉफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया, खिलाड़ियों ने कहा है कि कुंबले बहुत ज्यादा बॉसगिरी दिखाते हैं। खिलाड़ियों ने कुंबले पर थकान और चोट से निपटने के लिए अमानवीय तरीके अपनाने का आरोप लगाया है। अगले दो दिनों में बीसीसीआई कोच पद के आवेदकों का इंटरव्यू लेगी।
बोर्ड के एक्टिंग सेक्रेटरी अमिताभ चौधरी और जनरल मैनेजर एमवी श्रीधर ने खिलाड़ियों से बातचीत की है।

क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी (सीएसी) के अहम सदस्य सौरव गांगुली पिछले हफ्ते टीम के खिलाड़ियों से मिले थे। अधिकारी ने कहा, सीएसी को यह बताया जा चुका है कि बीसीसीआई या सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों का कोच चुनने में कोई रोल नहीं होगा। अंदरुनी खबरों के मुताबिक अनिल कुंबले के सपोर्ट में केवल एक ही खिलाड़ी है, बाकी अन्यों ने चुप्पी साध ली।

एक खिलाड़ी ने यह भी कहा कि कुंबले के जिद्दी रवैये के कारण उसे सर्जरी के लिए मजबूर होना पड़ा। डीएनए इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक खिलाड़ियों ने बीसीसीआई को बताया कि 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान गैरी कर्स्टन और कुंबले के बीच फर्क यह है पूर्व कोच एक दोस्त की तरह थे,जो बातों को गुप्त रखते थे। जबकि कुंबले सख्त अनुशासन का अपना ही उदाहरण देते रहते हैं और बातें औरों तक पहुंचाते हैं।

इससे पहले विराट कोहली ने शुक्रवार (2 जून) को अनिल कुंबले के साथ मतभेद की अटकलबाजियों को खारिज करते हुए कहा था कि मुख्य कोच से उन्हें कोई समस्या नहीं थी और यह पूरी घटना सिर्फ अफवाह है। कोहली ने कहा था, ‘‘काफी ज्यादा अटकलें लगाई गई हैं और जो लोग चेंज रूम का हिस्सा नहीं थे, उन्होंने काफी चीजें लिखी हैं जो काफी हैरानी की बात है। ऐसी कोई भी समस्या नहीं है।’’

कोहली ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा था, ‘‘सहमति और असहमति होती है। मैं उन चीजों के बारे में टिप्पणी नहीं करूंगा, जिनके बारे में मैं पहले से ही नहीं जानता। मैं अटकलें नहीं लगाऊंगा। मुझे लगता है कि इस समय धैर्य की कमी है और कोई भी अपनी गलती स्वीकारने को तैयार नहीं है।

अगर आप (मीडिया) कुछ चीज लिखते हो और यह गलत हो जाता है तो आप यह कहने के बजाय कि समस्या का निवारण हो गया, इतना तो स्वीकार कीजिए कि आप गलत थे।’’

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