राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बदरीनाथ धाम में की पूजा अर्चना,भेंट में कलेऊ मिला

उत्सव, उमंग और आस्था के बीच शनिवार को ब्रह्ममुहूर्त में भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। सुबह 4.15 पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ छह माह के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। तीर्थयात्री बदरीनाथ की अखंड ज्योति के दर्शन करने को उत्सुक नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सिंघद्वार से मंदिर के अंदर गए और उन्होंने पूजा अर्चना की। पुरुषसूक्त के उच्चारण के साथ राष्ट्रपति ने पूजा की और गर्भगृह से बाहर निकल गए।

सिंहद्वार पर बदरी-केदार मंदिर समिति की ओर से राष्ट्रपति को कलेऊ दिया गया। रिंगाल से बनी टोकरी में सजा है ये कलेऊ। बदरीनाथ की वॉल हेडिंग राष्ट्रपति को भेंट की गई। अब नाश्ता करने के लिए वे गुजराती भवन की ओर निकल गए हैं। मंदिर के रावल (पुजारी) की ओर से उन्हें प्रसाद भेंट किया गया।

क्या है पुरुषसूक्त ऋग्वेद संहिता
पुरुषसूक्त ऋग्वेद संहिता के दसवें मण्डल का एक प्रमुख सूक्त यानी मंत्र संग्रह है। इसमें एक विराट पुरुष की चर्चा हुई है और उसके अंगों का वर्णन है। यहां पुरुष शब्द का अर्थ जीवात्मा और परमात्मा है।

बदरीनाथ में गुजराती धर्मशाला को राष्ट्रपति भवन का दर्जा दिया गया है। राष्ट्रपति ने धर्मशाला में जलपान किया। प्रणब मुखर्जी पांचवें राष्ट्रपति हैं, जो बदरीनाथ के दर्शन करने पहुंचे हैं। एस शुभलक्ष्मी द्वारा गाए गए विष्णु सहस्रनाम से बदरीनाथ परिसर गूंज रहा है।

विदेशी फूलों से सजा मंदिर

कपाटोद्घाटन के लिए बदरीनाथ मंदिर को विदेशी फूलों से खास तरह से सजाया गया है। कपाट खुलने के मौके पर भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए देश-विदेश से लगभग 12 हजार यात्री बदरीनाथ पहुंचे हैं। जिनमें से 6 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए हैं। बदरीनाथ धाम के मुख्य सिंह द्वार के दोनों ओर तड़के तीन बजे से ही संस्कृत छात्रों की वेद ऋचाएं गूंज रही हैं। सुबह 4 बजे पहले धर्माधिकारी समेत वेदपाठी मंदिर समिति के अधिकारी और हक-हकूकधारियों ने पूजा-अर्चना की।

यहां द्वार पूजा के साथ ही छह माह तक धाम के कपाट खोलने की संकल्प पूजा हुई। सबसे पहले प्रात: 4.10 बजे सिंहद्वार पर लगा ताला खोला गया। थोड़ी देर बाद धाम के सभी कपाट खोल दिए गए। सबसे पहले रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरीपाद ने मंदिर के अंदर प्रवेश किया। वह परंपरानुसार पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर के बाहर सेना की गढ़वाल स्काउट के बैंड की भक्तिमय धुनें गूंज रही हैं। स्थानीय महिलाएं और देश-विदेश से आए तीर्थयात्री ने मनमोहक नृत्य कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण में भगवान बदरीनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं।

हेलीपैड से उतरे

राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर बदरीनाथ में सेना के हेलीपैड पर उतारा गया। सेना के विशेष हेलीकॉप्टर एमआई 17 से राष्ट्रपति देहरादून से बदरीनाथ पहुंचे। हेलीपैड से राष्ट्रपति डोली में मंदिर तक पहुंचेंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हेलीकॉप्टर से पहले रेकी हेलीकॉप्टर हेलीपैड पर उतरा था।

गढ़वाल के आयुक्त विनोद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए बदरीनाथ मंदिर परिसर राष्ट्रपति के आने के चलते 100 मीटर क्षेत्र को जीरो जोन रखा गया है। बदरी केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि राष्ट्रपति पूजा सभा गृह में भगवान के निर्वाण दर्शन, संकल्प लेंगे। धर्माधिकारियों द्वारा स्वास्ति वाचन, पुरुषसूक्त मंत्रों का उच्चारण करेंगे।

आस्था की शक्ति

बदरीनाथ धाम की यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में उत्साह देखते ही बन रहा है। कपाट खुलने से पहले देर रात तक तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। कड़ाके की ठंड में श्रद्धालु भगवान बदरीनाथ के दर्शन को आतुर नजर आ रहे हैं।

शुक्रवार को पूरी रात बदरीनाथ के जायकरों से बदरीशपुरी गूंजती रही। भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए तीर्थयात्री शुक्रवार शाम से ही लाइन में लग गए। कई यात्री लाइन में बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ और बदरीनाथ की स्तुति कर रहे हैं। कपाट खुलने से करीब 12 घंटे पहले ही मंदिर के बाहर लंबी लाइन लग गई थी। कड़ाके की सर्दी में भी श्रद्धालु रातभर जागकर सुबह कपाट खुलने का इंतजार कर रहे थे। करीब 15 हजार यात्री शुक्रवार रात तक बदरीनाथ पहुंच चुके हैं।

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