नोटबंदी के बाद जमा कराए थे बैंक में पैसे तो इस बार जरूर फाइल करें इनकम टैक्स रिटर्न

नोटबंदी के फैसले के बाद अगर आपने अपने बैंक खाते में 2 लाख से ज्यादा नकदी जमा कराई है तो आपके लिए बेहतर होगा कि इस बार इनकम टैक्स रिटर्न जरूर दाखिल कर दें। भले ही आपने इससे पहले कभी भी आईटीआर फाइल न किया हो, लेकिन इस बार रिटर्न फाइल कर आप खुद को बड़ी मुसीबत से बचा सकते हैं। आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2016-17 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। गौरतलब है कि बीते साल 8 नवंबर को नोटबंदी का फैसला लिया था जिसकी वजह से 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य कर दिया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद लोगों ने भारी मात्रा में बैंकों में नकदी जमा कराई थी। अब आयकर विभाग की नजर ऐसे बैंक खातों पर है जिनमें अचानक से भारी मात्रा में पैसा जमा हुुआ था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट:
टैक्स फर्म ई-मुंशी के फाउंडर और चार्टेड अकाउंटेंट अंकित गुप्ता ने बताया, “अगर आपने 8 नवंबर से 30 दिंसबर के बीच 2 लाख से ज्यादा की नकदी जमा कराई है तो इस बार आपके लिए रिटर्न फाइल करना फायदे का सौदा होगा। इनकम टैक्स रिटर्न में आप जमा की गई राशि का जिक्र करके टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से की जाने वाली कार्यवाही से बच सकते हैं।

अंकित ने बताया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको धारा 133 (4) के तहत आपको एक नोटिस भेज सकता है जिसमें आपसे नोटबंदी के दौरान नकदी जमा करने को लेकर काफी सारे सवालों के जवाब मांगे जा सकते हैं। आयकर विभाग के पास ऐसा करने का कानूनन अधिकार है। ऐसे में आप पहले ही रिटर्न में इस राशि का जिक्र कर उस पर टैक्स अदायगी करके अपना बचाव कर सकते हैं।

किसके लिए रिटर्न भरना जरूरी:
जिस टैक्सपेयर की सालाना आय 2.50 लाख रुपए से ऊपर है या 1 अप्रैल 2016 से लेकर 31 मार्च 2017 तक जिस किसी भी व्यक्ति को इस राशि से अधिक की सालाना आय हुई है उसके लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(1) के तहत आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है। इसके अलावा जिन लोगों को स्वेच्छा से आईटीआर फाइल करना है उन्हें भी विभाग की ओर से रोका नहीं जाएगा।

अगर आपने नोटबंदी के दौरान भारी मात्रा में नकदी जमा कराई है और आप इसको लेकर असमंजस में हैं तो आपके पास इसकी जानकारी देने का एक तरीका है। अगर आपने नोटबंदी के दौरान भारी भरकम राशि अपने अकाउंट में जमा कराई है और वो राशि आपकी इस साल की आय है तो आप इसको अपने आईटीआर में दिखाएं और साथ ही आयकर विभाग को इसकी जानकारी देना न भूलें।

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